पेट्रो दस्तावेज़ केस: सात गिरफ़्तारियां

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पेट्रोलियम मंत्रालय से कथित तौर पर महत्वपूर्ण दस्तावेज़ चुराकर उन्हें ऊर्जा क्षेत्र की कंपनियों को बेचने के मामले में पुलिस ने अब तक सात लोगों को गिरफ़्तार किया है.

इनमें पेट्रोलियम मंत्रालय के दो अधिकारी, रिलायंस इंडस्ट्रीज़ का एक कर्मचारी, दो बिचौलिए और पूर्व पत्रकार शांतनु सैकिया शामिल हैं.

जांचकर्ता सभी आरोपियों को घटनास्थल यानी शास्त्री भवन भी ले गए.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, इन पर सरकारी दस्तावेज़ ग़ायब करने, जालसाज़ी और इमारत में ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से घुसने का आरोप है.

दिल्ली पुलिस आयुक्त बीएस बस्सी ने संवाददाताओं को बताया, "गिरफ़्तार लोगों के पास जो दस्तावेज़ मिले हैं, वो आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम का उल्लंघन करते हैं या नहीं, इसकी जांच चल रही है."

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उन्होंने कहा, "धोखाधड़ी से जुड़ी आईपीसी की धारा 467, 468 और 471 लगाई गई हैं. मामले से जुड़े कुछ और लोगों से भी पूछताछ होगी. "

मामला

  • बीते मंगलवार की रात कुछ लोगों को पेट्रोलियम मंत्रालय के दफ़्तर में ग़ैक़ानूनी तरीके से घुसने और सरकारी दस्तावेज़ से जुड़ी जानकारी लीक करने का अभियुक्त बताया गया.
  • इन ग़ायब किए गए दस्तावेज़ों में ऊर्जा मूल्य निर्धारण और नीतिगत मामलों से जुड़ी जानकारियां हैं.
  • बताया गया कि इनकी फ़ोटोकॉपी ऊर्जा क्षेत्र की कंपनियों के लिए काम करने वालों को बेची जाती थीं.
  • दावा किया गया है कि कुछ लोगों ने इमारत के भीतर पहुंचने के लिए डुप्लीकेट गेट पास और डुप्लीकेट चाभी की मदद ली.

बढ़ती लॉबिंग

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घरेलू ऊर्जा उद्योग पर मुख्य रूप से सरकारी कंपनियों का नियंत्रण है. इसमें तेल और गैस की रिफाइनिंग-मार्केटिंग शामिल है.

पूरी तरह से सरकारी नियंत्रणके कारण इस क्षेत्र में गंभीर रूप से लॉबिंग की प्रवृत्ति पाई गई है.

इस कारण ऊर्जा के क्षेत्र में कई प्रभावशाली निजी कंपनियों का दखल देखने को मिला है. भारत को बढ़ती हुई ऊर्जा संबंधी मांग पूरी करने के लिए अपने तेल का 80 फ़ीसदी और गैस का 40 फ़ीसदी आयात करना पड़ता है.

आर्थिक मामलों के जानकार परंजॉय गुहा ठाकुरता ने बीबीसी को बताया, "निजी कंपनियों की ओर से इस क्षेत्र में गंभीर लॉबिंग चल रही है. इनका मक़सद ऊर्जा संबंधी क़ीमतों से जुड़े सरकारी फ़ैसलों का सुराग़ लेकर फ़ायदा उठाना है."

अभियुक्त

17 फ़रवरी और उसके बाद इस केस में जिन्हें गिरफ़्तार किया गया है, उनकी पहचान लालता प्रसाद (36), राकेश कुमार (30), राज कुमार चौबे (39) के रूप में की गई है.

पुलिस का कहना है कि उनके पास सरकारी दस्तावेज़ भी मिले हैं.

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Image caption पेट्रोलियम राज्य मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मामले के दोषियों पर कठोर कार्रवाई की बात कही.

इसके अलावा दो अन्य अभियुक्त आशाराम और ईश्वर सिंह हैं. दोनों ही मंत्रालय के कर्मचारी हैं.

पूर्व पत्रकार शांतुन सैकिया को भी गिरफ़्तार किया गया है. वे 'पेट्रोवॉच' नाम की वेबसाइट चलाते हैं. उन पर चुराए गए दस्तावेज ख़रीदने का आरोप है. बताया जा रहा है कि सैकिया के पास कथित तौर पर आपत्तिजनक कुछ दस्तावेज़ भी मिले हैं.

पेट्रोलियम राज्यमंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि घटना के पीछे जो भी होगा, उनके ख़िलाफ़ 'कठोर कार्रवाई' की जाएगी.

दूसरी ओर रिलायंस इंडस्ट्रीज़ का बयान आया है, जिसमें उनके एक कर्मचारी को हिरासत में लिए जाने की बात कही गई है. रिलायंस इंडस्ट्रीज़ ने जांच में मदद की भी बात कही है.

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