नहीं उतरेगी 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे'

दिलवाले दुल्हनिया ले जाएगें इमेज कॉपीरइट Yash Raj Films

बीस साल पहले रुपहले पर्दे पर आई राज और सिमरन की प्रेम कहानी से शायद दर्शकों को भी इश्क़ हो गया है.

यही वजह है कि 20 साल से मुंबई के मराठा मंदिर में लगातार चल रही फ़िल्म ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ को पर्दे से उतारने का फैसला प्रशंसकों को पसंद नहीं आया.

आख़िर इतने साल बाद भी दर्शक क्यों 'दिलवाले दुल्हनियां ले जाएंगे' यानी 'डीडीएलजे' को नहीं भूल पाए हैं.

सुपरहिट फ़िल्म

इमेज कॉपीरइट AFP

मराठा मंदिर के मालिक मनोज देसाई कहते हैं कि उन्होंने यह फ़िल्म कम-से-कम 10 बार देखी है और इसके गाने सैकड़ों बार सुने हैं.

इस फ़िल्म में वह सब कुछ है जो इसे सुपर हिट बनाता है– बढ़िया डायलॉग, ख़ूबसूरत संगीत और कॉमेडी.

आदित्य चोपड़ा निर्देशित 189 मिनट की यह फ़िल्म शाहरुख़ ख़ान के लिए महज तीन साल के बॉलीवुड करियर के बाद सुपरस्टार का ख़िताब लेकर आई थी.

यशराज बैनर तले बनी डीडीएलजे ने आज तक कुल कितनी कमाई की, इसके आंकड़े तो उपलब्ध नहीं है पर कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार इस फ़िल्म ने भारत में 100 करोड़ रुपए से अधिक की कमाई की है.

फ़िल्म में क्या ख़ास?

इमेज कॉपीरइट Reuters

डीडीएलजे की कहानी सीधी-सादी है. ब्रिटेन में पले-बढ़े राज और सिमरन ट्रेन में सफ़र के दौरान मिलते हैं और उन्हें एक दूसरे से प्यार हो जाता है. सिमरन को शादी के लिए उसके पिता पंजाब ले जाते हैं.

राज उसके पीछे पंजाब तक आता है, पर सिमरन को भगाकर ले जाने के बजाय वह कोशिश करता है कि परिवार में सबकी रज़ामंदी से उनकी शादी हो.

इमेज कॉपीरइट Reuters

कई रोमांचक मोड़ से गुज़रने के बाद फिल्म के अंत में सिमरन के पिता अपनी बेटी को ख़ुशी से राज के साथ विदा करते हैं.

फ़िल्म समीक्षकों के अनुसार काजोल का तौलिए में पर्दे पर आना, फ़िर माइक्रो मिनी में बारिश में डांस करना बेहद ख़ूबसूरत था. जहां एक ओर काजोल ने फ़िल्म में बढ़िया एक्टिंग की, वहीं दूसरी ओर शाहरुख़ ने एक यक़ीन से भरपूर प्रेमी के रूप में अच्छा काम किया था.

इमेज कॉपीरइट YASHRAJ FILMS

एक साफ़ सुथरी पारिवारिक फिल्म के रूप में भी डीडीएलजे को सराहा गया.

मराठा मंदिर

मराठा मंदिर में पिछले दो दशकों (1009 सप्ताह) से चल रही ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ ने रमेश सिप्पी की 1975 में बनी फ़िल्म शोले का रिकॉर्ड तोड़ा है, जो मुंबई थिएटर में तक़रीबन पांच साल चली थी.

इमेज कॉपीरइट Reuters

1105 सीट के इस सिनेमा हॉल में जब दर्शकों की भीड़ मुट्ठीभर ही रह गई, तब देसाई ने तय किया कि इस फ़िल्म को अब पर्दे से उतारना ही ठीक रहेगा.

पर दर्शकों का उत्साह देखते हुए तय हुआ कि मराठा मंदिर से डीडीएलजे को उतारा नहीं जाएगा.

राज और सिमरन की प्रेम कहानी को आज भी यहां मात्र 20 रुपए का टिकट ख़रीदकर देखा जा सकता है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार