भूमि अधिग्रहण पर शिवसेना भी साथ नहीं

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भूमि अधिग्रहण क़ानून के मामले केंद्र सरकार विरोधियों ही नहीं, बल्कि अपने सहयोगी दलों के निशाने पर भी है.

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने पिछली सरकार के ज़मीन अधिग्रहण क़ानून में कुछ संशोधन कर अध्यादेश के ज़रिए क़ानून बनाया था, जिसका अब संसद और सड़क पर विरोध हो रहा है.

सरकार की सहयोगी शिव सेना के नेता संजय राउत का कहना है, "किसानों का गला घोंटने वाला कोई भी क़ानून शिव सेना को मंज़ूर नहीं है. किसान बड़ी उम्मीद से हमें सत्ता में लेकर आए हैं."

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उन्होंने कहा, "किसानों के साथ विश्वासघात करने वाला कोई भी कदम सरकार नहीं उठाएगी और शिवसेना की भूमिका किसानों के साथ रहेगी, इतना ही उद्धव ठाकरे जी ने कहा है."

भूमि अधिग्रहण क़ानून के आलोचकों का कहना है कि इससे किसानों की ज़मीन छीनने की तैयारी हो रही है जबकि सरकार इसे विकास के लिए ज़रूरी बता रही है.

समाजसेवी अन्ना हज़ारे भी अपने हज़ारों समर्थकों के साथ दिल्ली इस क़ानून का विरोध कर रहे हैं.

वहीं, मुख्य विपक्ष दल कांग्रेस आज इस मुद्दे पर दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक रैली करने जा रही है.

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