नीले रंग में रंगे जाएंगे 'अच्छे' कुत्ते

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उत्तर प्रदेश में बरेली ज़िले की बहेरी तहसील के गांवों के शरीफ़ कुत्तों को अब उनके 'अच्छे स्वभाव' के लिए नीले रंग में रंगा जाएगा.

इससे ख़ूंखार कुत्तों से अलग उनकी पहचान की जा सकेगी जो अब तक बहेरी में छह बच्चों की मौत का कारण बन चुके हैं.

किच्छा नदी के बगल में बसा बहेरी उत्तराखंड के तराई के जंगलों के पास है. ज़िला मुख्यालय बरेली से क़रीब 50 किलोमीटर दूर है.

करीब डेढ़ महीने से जंगली कुत्तों के झुंड ने बहेरी में आतंक फैला रखा है.

बच्चों की मौत

इनके काटने से पांच बच्चों की इलाज के दौरान मौत हो चुकी है. स्थानीय अस्पताल में एक और बच्चे ने शुक्रवार सुबह इलाज के दौरान दम तोड़ दिया.

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अब ज़िला प्रशासन ने काटने वाले कुत्तों के ख़िलाफ़ अभियान शुरू किया है. बरेली के ज़िलाधिकारी शनिवार को बहेरी का दौरा करेंगे.

ग्रामीण और प्रशासन के लोग नहीं चाहते कि शांत स्वभाव के कुत्तों को मारा जाए पर समस्या यह थी कि हमलावर जंगली कुत्तों की पहचान कैसे की जाए.

इसे देखते हुए बहेरी के गांव वाले अब 'अच्छे' कुत्तों को नीले रंग में रगेंगे.

कुत्तों पर रंग लगाने का ज़िम्मा बरेली के एसडीएम रामेश्वर नाथ तिवारी को दिया गया है.

उनका कहना था,"कुत्तों पर रंग ऐसा डाला जाएगा जिससे उनको कोई हानि न पहुंचे. रंग छूट जाने पर फिर रंग डाला जाएगा.

गुरुवार को आठ कुत्तों को पकड़कर उन्हें बहेरी से दूर छोड़ा गया है.

शिकार

बरेली के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट अरुण कुमार ने बीबीसी को बताया, "बहेरी के कुछ गावों में जंगली कुत्तों के काटने से छह बच्चों की मौत हो चुकी है. काटने वाले कुत्तों के लिए कदम उठाये जा रहे हैं, लेकिन जो कुत्ते निर्दोष हैं, उनके साथ मानवतापूर्ण व्यवहार करना चाहिए.''

उन्होंने कहा,''जिन कुत्तों पर रंग नहीं होगा उन्हें प्रशासन और वन विभाग के कर्मचारी पकड़ेंगे और बहेरी से दूर छोड़कर आएंगे."

कुमार ने कहा कि कुत्तों का यह झुंड अमूमन अकेले बच्चे या अकेली महिला पर हमला कर रहा है.

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