अब तक कौन कौन हुए हैं बरी

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गुजरात में 2002 में हुए दंगों के दौरान हिम्मतनगर में तीन ब्रितानी नागरिकों समेत चार लोगों की हत्या के मामले में सभी छह अभियुक्तों को बरी कर दिया गया है.इस तरह 2002 के गुजरात दंगों के 250 अभियुक्तों को उन केसों में बरी कर दिया गया है जिन की जाँच विशेष जाँच दल कर रहा था.

गुजरात दंगे का ये दूसरा केस है जिसमें सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया है. इससे पहले अबसाना दंगा मामले में 29 लोगों को अदालत ने बरी किया था. इस दंगे में छह लोग मारे गए थे. लेकिन इस केस की जाँच सुप्रीम कोर्ट के विशेष जाँच दल ने नहीं की थी.

विशेष जाँच दल की नियुक्ति

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राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन और अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं ने गुजरात सरकार पर इल्ज़ाम लगाया कि वह दंगों के लिए ज़िम्मेदार लोगों को बचा रही है. तब 2008 में सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात दंगों के 9 मामलों की निगरानी शुरू की. बाद में कोर्ट ने इन मामलों की जाँच के लिए विशेष जाँच दल नियुक्त कर दिया.

ये नौ मामले थे- गोधरा हत्याकांड, गोधरा के बाद प्राणजित, गुलबर्ग, नरोदा पाटिया, नरोदा गाम, ओड गांव, दिपदा दरवाज़ा और सरदारपुरा में हुए दंगे.

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सात मामलों की जाँच पूरी हो चुकी है और इन सात मामलों में 400 से ज़्यादा आरोपियों में से 147 का अपराध सिद्ध हुआ और 256 को बरी कर दिया गया.

फिलहाल गुलबर्ग सोसायटी और नरोदा गाम केसों का मुकदमा चल रहा है. दंगों में पूरी गुलबर्ग सोसायटी को जला दिया गया था जिसमें 69 लोग मारे गए जबकि नरोदा गांम में 11 लोग मारे गए थे.

कुख्यात नरोदा पाटिया हत्याकांड की मुख्य अभियुक्त और गुजरात की पूर्व मंत्री मायाबेन कोडनानी को ज़मानत दे दी गई है. इस हत्याकांड में 95 लोग मारे गए थे. कोडनानी को 28 साल की सज़ा सुनाई गई थी. इसी केस के एक और अभियुक्त बाबू बजरंगी कौ भी अस्थाई ज़मानत दे दी गई है जबकि कोडनानी के निजी सहायक, किरपाल सिंह छाबड़ा को भी ज़मानत दे दी गई है. छाबड़ा को इस मानले में उम्र कैद की सज़ा सुनाई गई थी.

आंकड़ों में गुजरात दंगा अब तक

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2002 के दंगे- विशेष जाँच दल के केस और अपराध सिद्धि का संक्षेप में ब्योरा -

गोधरा हत्याकांड- 59 की मौत, 31 अपराधी, 63 बरी

सरदारपुरा- 33 की मौत, जो 42 लोग बरी किए गए उनमें 31 का अपराध सिद्ध, उम्रकैद की सज़ा.

ओड गांव-दो केस- 26 की मौत, 9 अभियुक्तों को उम्रकैद, 32 बरी. दूसरे केस में- 23 मारे गए, 23 का अपराध सिद्ध, 23 बरी और एक की सुनवाई के दौरान मौत.

नरोदा पाटिया- 95 की मौत, 32 अभियुक्तों को उम्र कैद. उनमें से 29 बरी. पूर्व गुजरात मंत्री माया कोडनानी को अपराध सिद्ध होने के बाद ज़मानत दी गई.

गुलबर्ग सोसायटी- 69 की मौत, मुकदमा अभी चल रहा है.

नरोदा गांम- 11 की मौत, सुनवाई जारी है

दीपदा दरवाज़ा- 14 की मौत, 22 पर आरोप तय, 61 बरी.

प्राणजित - 3 ब्रितानी नागरिकों की हत्या, सभी 6 आरोपी बरी.

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