अरविंद में दो गंभीर कमियां हैंः प्रशांत

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आम आदमी पार्टी नेता और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने समाचार चैनल एनडीटीवी से बातचीत में कहा है कि उनकी केजरीवाल से कुछ मुद्दों पर असहमति है पर वे पार्टी छोड़ने के बारे में विचार नहीं कर रहे हैं.

एनडीटीवी को दिए इंटरव्यू में प्रशांत भूषण ने कहा, “दुर्भाग्य से अरविंद केजरीवाल और मेरी बातचीत नहीं हुई है. मैं उनसे बातचीत का इच्छुक हूं.”

इससे पहले प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी को भेजे एक पत्र में पार्टी से जुड़े कई मुद्दों को उठाया था.

चार मार्च को आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक होने वाली है और योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण के पोलिटिकल अफ़ेयर्स कमेटी में बने रहने पर अटकलें लगाई जा रही हैं.

उधर 'आप' के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा है कि वे इन गतिविधियों से दुखी हैं और जनता के विश्वास को टूटने नहीं देंगे.

अरविंद में कमियां

अपने और अरविंद केजरीवाल के बीच मतभेदों पर पूछे एक सवाल पर प्रशांत भूषण ने कहा, “मैंने अरविंद से कहा कि आप में दो गंभीर कमियां हैं जिन्हें ठीक किया जाना चाहिए. आपको लगता है कि आपके हर फ़ैसले का पालन होना चाहिए. आपका राजनीतिक निर्णय ज़्यादातर ठीक होता है, लेकिन वो ग़लत भी हो सकता है, इसलिए बेहतर ये होगा कि फैसला लेने की प्रक्रिया का विकेंद्रीकरण हो.”

प्रशांत भूषण ने अरविंद केजरीवाल से असहमति पर कहा, “मेरा मानना है कि हमें अपनी नीति संबंधी सिद्धांतों पर अडिग रहना चाहिए, जबकि अरविंद को लगता है कि राजनीति में समझौते करने पड़ते हैं.”

उन्होंने कहा कि वो हाईकमांड कल्चर के खिलाफ़ हैं और अगर उन्हें ऐसा लगा कि पार्टी में इसे खत्म नहीं किया जा सकता तो वो पार्टी छोड़ देंगे.

'कल उठाना चाहिए था मुद्दा'

उधर इस साक्षात्कार के बाद अरविंद केजरीवाल ने अपने ट्वीट में कहा है कि जो कुछ पार्टी में हो रहा है वो उससे दुखी हैं.

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अरविंद ने कहा, “दिल्ली ने हमारे ऊपर विश्वास जताया है. ये उनके साथ धोखा है. मैं सिर्फ़ दिल्ली के शासन पर ध्यान दूंगा. जनता के भरोसे को किसी भी हालत में टूटने नहीं दूंगा.”

पार्टी प्रवक्ता आशुतोष ने एक ट्वीट में कहा कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी फ़ैसला लेने की सबसे उच्च संस्था है और उसे किसी भी मुद्दे पर फ़ैसले लेने का अधिकार है.

आशुतोष ने कहा, “प्रशांत जी को पर्सनैलिटी कल्ट का मुद्दा कल होने वाली राष्ट्रीय कार्यकारिणी में उठाना चाहिए था न कि मीडिया में. राष्ट्रीय कार्यकारिणी इस पर कोई फ़ैसला लेती.”

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