'कुछ क्रिकेट खिलाड़ी ग्लैमर में खो जाते'

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Image caption सचिन तेंदुलकर के साथ अनुराग ठाकुर.

इसी हफ़्ते जगमोहन डालमिया भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के अध्यक्ष और अनुराग ठाकुर सचिव चुने गए. बीसीसीआई के कई पदाधिकारी पिछले कुछ समय से विवादों में घिरते रहे हैं.

इस समय जो सवाल है वो कि बोर्ड क्रिकेट की छवि कैसे सुधारेगा. बीबीसी ने इस और दूसरे सवालों को लेकर ख़ास बातचीत की सचिव अनुराग ठाकुर से.

ये चुनाव बिल्कुल पारदर्शी थे

बीसीसीआई के चुनाव की पारदर्शिता को लेकर जो अटकलें लगाई जा रही थीं उसपर अनुराग ठाकुर ने कहा, "ये चुनाव पारदर्शी हैं और ऐसा नहीं है कि चुनाव के बाद भी पुराने लोगों का ही दबदबा रहेगा."

उन्होंने कहा, "कभी लोग कहेंगे कि मैं डालमिया के साथ हूँ, कभी श्रीनिवासन के साथ, कभी शरद पवार के साथ लेकिन ये सब कहने की बातें हैं. मैं क़िसी के साथ नहीं. चुनाव हुए और मतों के आधार पर परिणाम आए. जिसकी जांच कभी भी की जा सकती है लेकिन अब मैं सिर्फ़ इस बात पर ध्यान दूँगा कि क्रिकेट को आगे कैसे ले जाया जाए."

खिलाड़ी ग्लैमर की चकाचौंध में खो जाते हैं

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Image caption अनुराग ठाकुर एक मैच में बल्लेबाज़ी करते हुए.

दुनिया भर में जब भी मैच फिक्सिंग की बात आई है तो उसने खेल की छवि को बहुत खराब किया है. बीसीसीआई भी इस तरह के विवादों से परा नहीं है.

इसपर अनुराग ठाकुर का कहना है, "अगर कोई खिलाड़ी अपनी क्षमता या क़ाबिलियत से कम खेलता है तो उसे कड़ी से कड़ी सज़ा मिलनी चाहिए. ऐसा खिलाड़ी छल करता है और क्रिकेट प्रेमियों का विश्वास तो़ड़ता है."

हालांकि उन्होंने यह भी कहा, "लेकिन ऐसे हर मामले की जाँच भी ठीक तरह से होनी चाहिए. जहाँ तक रही बात मैच फिक्सिंग की तो इसके कुछ कारण हैं. उनमें से एक है कि कुछ खिलाड़ी कामयाबी तो बहुत जल्दी हासिल कर लेते हैं लेकिन उसे संभाल नहीं पाते फिर वो क्रिकेट की चकाचौंध में खो जाते हैं."

क्रिकेट और राजनीति

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Image caption जगमोहन डालमिया बीसीसीआई के नए अध्यक्ष चुने गए हैं.

कई भारतीय नेता देश के विभिन्न क्रिकेट बोर्डों से जुड़े रहे हैं. अनुराग ठाकुर राजनीति में भी दिलचस्पी रखते हैं. ठाकुर ने बताया कि राजनीति में आने से पहले वो 25 साल की उम्र में ही बीसीसीआई से जुड़ गए थे.

हिमाचल क्रिकेट संघ के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर बताते हैं, "मैं क्रिकेटर रहा हूँ. पंजाब के अंडर-16 और अंडर-19 टीम के लिए खेला, उनका कप्तान रहा, नॉर्थ ज़ोन अंडर-19 टीम का कप्तान रहा, गुरुनानकदेव यूनिवर्सिटी और पंजाब टीम के लिए रणजी टीम में भी रहा."

क्रिकेट छोड़ने की वजह पर वो बोले, "मुझे क्रिकेट छोड़नी पड़ी क्योंकि पिताजी प्रेम कुमार धूमल राजनीति में थे. लेकिन फिर फ़ेेमिली के कामकाज में हाथ बंटाना पड़ा और फिर मैं राजनीति में गया. तीसरी बार सांसद बना...लेकिन क़िस्मत का खेल देखिए कि मैं फिर से क्रिकेट की दुनियां में वापस आ गया हूं."

डालमिया और मेरा साथ पुराना

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ठाकुर मानते हैं कि "अगर क्रिकेट में सुधार लाना है तो हर स्तर पर काम होना चाहिए. संघीय ढाँचे में हर स्तर की हर राज्य की बॉडी को काम करना होगा. बीसीसीआई गाइडलाइंस देता है लेकिन राज्यों को काफ़ी निर्णय अपने बल पर लेने होते हैं.

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