'इंडियाज डॉटर' पर तीखी प्रतिक्रिया

इमेज कॉपीरइट

दिल्ली गैंगरेप पर बनी डॉक्यूमेंट्री 'इंडियाज़ डॉटर' के प्रसारण को लेकर उठे विवाद ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी सुर्खियां बटोरी हैं.

अमरीकी अख़बार 'न्यूयॉर्क टाइम्स' ने लिखा है कि डॉक्यूमेंट्री पर प्रतिबंध के बावजूद भारतीय लोग इसे बड़े पैमाने पर देख रहे हैं.

वहीं अमरीका के ही एक दूसरे बड़े अख़बार 'वाशिंगटन पोस्ट' के अनुसार, लगता है कि भारतीय अधिकारियों के लिए इस फ़िल्म को बंद करवाना सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गया है, लेकिन सोशल मीडिया के इस दौर में यह मुश्किल लगता है.

ब्रिटेन के अख़बार 'गार्डियन' ने अपने संपादकीय में लिखा है कि इस डॉक्यूमेंट्री पर प्रतिबंध लगाकर ऐसा लगता है कि भारत की सरकार बलात्कार और महिला विरोध के बीच के संबंध को समझना नहीं चाहती है.

प्राथमिकता

इमेज कॉपीरइट

ब्रिटेन का ही एक दूसरा अख़बार 'द इंडिपेंडेंट' लिखता है कि भारत के लोग तो लिंग भेद को लेकर समाज की सच्चाई स्वीकार करने को तैयार हैं, लेकिन वहां के राजनेता नहीं.

अख़बार आगे लिखता है कि 'इंडियाज़ डॉटर' डॉक्यूमेंट्री पर प्रतिबंध से पता चलता है कि सरकार की प्राथमिकता कितनी गलत है.

इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption डॉक्यूमेंट्री 'इंडियाज़ डॉटर' लेज़्ली उडविन ने बनाई है.

चीन के अख़बार 'चाइना डेली' ने लिखा है कि विशेषज्ञ फ़िल्म पर प्रतिबंध लगाने के मुद्दे पर आपस में बंटे हुए है.

एक तबके का मानना है कि डॉक्यूमेंट्री पर प्रतिबंध लगाने के बजाय न्यायालय को बलात्कार जैसे अपराध के मामले में जल्द से जल्द न्याय सुनिश्चित करना चाहिए.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार