मीरवाइज़ ने की वाजपेयी मॉडल की वकालत

मीरवाइज़ उमर फारूक़, प्रमुख, हुर्रियत कांफ्रेंस इमेज कॉपीरइट AP

भारत प्रशासित कश्मीर के अलगाववादी गुट हुर्रियत कांफ्रेंस के चेयरमैन मीरवाइज़ उमर फ़ारूख़ का कहना है कि वह भारत के साथ बातचीत को निहायत ज़रूरी मानते हैं और इसके लिए हमेशा तैयार हैं.

फ़ारूख़ ने बीबीसी से बातचीत में वाजपेयी मॉडल को दोबारा लागू करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया.

उन्होंने कहा कि जिस तरह वाजपेयी ने जम्मू-कश्मीर की समस्या को सुलझाने की शुरूआत की थी, वैसा ही एक बार फिर हो तो यह गुत्थी सुलझ सकती है.

उनका मानना है कि बातचीत का ठोस मक़सद होना चाहिए और इसमें कश्मीरियों तथा पाकिस्तानियों समेत सबको शामिल करना चाहिए.

फ़ारूख़ ने कहा, “अटल मॉडल की बुनियाद सच्चाई पर थी. ऐसा महसूस होता था कि भारत सरकार की सोच में एक बदलाव आया है."

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उन्होंने कहा, "उस दौरान सीमा पार के रास्ते खोले गये थे, दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच बातचीत शुरू हो गई थी. कश्मीरी लीडरशिप और इस्लामाबाद के बीच बातचीत शुरू हो गई थी. मौजूदा सरकार उस मॉडल पर चले तो बातचीत आगे भी हो सकती है.”

वाजपेयी मॉडल

यह पूछने पर कि कश्मीर में दूसरे अलगाववादी नेता बातचीत शुरू करने के लिए कुछ शर्तें लगाना चाहते हैं तो उन्होंने कहा, "अगर किसी को बातचीत के रास्ते पर आगे बढ़ने की ख़्वाहिश है तो बहुत से रास्ते निकल सकते हैं."

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उन्होंने कहा, "वाजपेयी ने बातचीत शुरू होने के बाद कहा था कि कश्मीर समस्या का हल इंसानियत के दायरे में निकल सकता है. इसलिए ज़रूरी है कि पहले बातचीत तो शुरू हो, फिर आगे का रास्ता भी निकलेगा."

फ़ारूख़ ने कहा कि अब तक ऐसा नहीं लगता है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कश्मीर समस्या के समाधान के प्रति गंभीर हैं. पर यदि मोदी पहल करें और सबको इसमें शामिल करें तो इसमें वह भी शिरकत कर सकते हैं और बात आगे बढ़ सकती है.

उन्होंने कहा कि भारत प्रशासित कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद ने भी बातचीत शुरू करने को कहा है. इससे साफ़ है कि वह भी इसकी ज़रूरत महसूस करते है.

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