बीबर के 'बेबी' ने इन्हें बनाया पॉपुलर

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मिलिए 15 साल की सानिया और 13 साल की मुकद्दस ताबेदार से जिन्हें आजकल 'जस्टिन बीबीज़' के नाम से जाना जाता है.

लाहौर के बाहरी इलाकों में रहने वाली सानिया और मुकद्दस जब जस्टिन बीबर का 'बेबी' गाती हैं, पड़ोस के घरों की खिड़कियों और छत से पड़ोसी तैबयदार घर के आसपास जमा हो जाते हैं.

ख़ुले में एक संगीत कार्यक्रम की तरह पुरुष, महिलाएं और बच्चे चिल्लाते हुए उन्हें देखने के लिए सबसे अच्छी जगह तलाशने की कोशिश में लग जाते हैं.

बीबर के लिए मुक़ाबला

Image caption जस्टिन बीबर 'बेबी' गाने वाली सानिया और मुकद्दस तैबयदार अपनी मां शहनाज़ के साथ

ये दोनों बहनें तब पॉपुलर हुईं जब इनका एक वीडियो वायरल हो गया. इस वीडियो में दोनों जस्टिन बीबर का गीत 'बेबी' गा रही हैं और पृष्ठभूमि पर एक लोटे जैसे बर्तन पर उनकी मां थाप देती नज़र आ रही थीं.

पाकिस्तान में सोशल मीडिया पर लोगों ने कहा कि ये दोनों बहनें जस्टिन बीबर को मुक़ाबला दे सकती हैं.

एक और व्यक्ति ने इन बहनों के बारे में कहा कि 'पाकिस्तान के पास टैलेंट है'.

सानिया ने कहा, "हम उस समय से गा रही हैं जब हम बहुत छोटी थीं. हमारे परिवार के कई और सदस्यों भी गाते हैं. हमें हर तरह के पाकिस्तानी और बॉलीवुड गाने पता हैं."

जस्टिन बीबर पसंद

बीबीसी से बातचीत सानिया ने कहा, "हमें जस्टिन बीबर पसंद है क्योंकि उनके गाने दिल में उतर जाते हैं. जब हमने 'बेबी' सुना हम नाचने-कूदने लगे, हम इसमें खो गए."

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वहीं मुकद्दस कहती हैं कि वे दोनों करीब सत्तर बार ये गाना सुन चुके हैं.

उन्होंने बताया, "मैंने तब तक कोशिश करती रही जब तक मैंने यह गाना पूरी तरह याद नहीं कर लिया."

नहीं आती अंग्रेज़ी

सानिया और मुकद्दस ग़रीब परिवार से हैं और प्राथमिक स्कूल के बाद इन्होंने आगे पढ़ाई नहीं की.

दोनों को अंग्रेज़ी नहीं आती इसलिए 'बेबी' गाने को याद करते वक्त इन्होंने शब्दों के उच्चारण को ध्यान में रखते हुए हर शब्द सुना और उसे उर्दू में लिखा. दोनों ने शब्द और धुन एक दूसरे को सिखाया.

जल्द ही कुछ स्थानीय टेलीविज़न चैनलों ने उन्हें लाईव गाना गाने के लिए आमंत्रित किया.

सब कुछ एक जादू की तरह है

उनकी नई शोहरत उनकी ज़िंदगी में एक बड़ा बदलाव है.

मुस्कुराते हुए सानिया ने बताया "हमें उम्मीद नहीं थी कि हमारे साथ यह होगा, हमें इतनी शोहरत मिलेगी. इस वीडियो के बाद हमें पहली बार हमें हवाई जहाज़ में सफ़र करने को मिला, हम टीवी पर आए. यह हमेशा से हमारा सपना था."

सानिया बताती हैं "हमारे बाल बनाए और मेक-अप किया गया. हम कभी ब्यूटी पार्लर नहीं गईं. यह सब एक जादू की तरह है और हमें नहीं पता कि आगे क्या होगा."

उनकी मां शहनाज़ ताबेदार ने कहा कि वे भी जस्टिन बीबर की बड़ी प्रशंसक हैं.

पेशेवर गायक बनें

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शहनाज़ कहती हैं, "मुझे अभी भी यक़ीन नहीं आता कि मेरी बेटियों के साथ यह सब हो रहा है, जस्टिन बीबर का बहुत धन्यवाद. मुझे वो बेहद पसंद है. वो मेरे बेटे की तरह है."

उन्होंने कहा, "मैं चाहती हूं कि मेरी बेटियां एक दिन पाकिस्तान और भारत में पेशेवर गायक बनें. मुझे उम्मीद है कि उन्हें समर्थन मिलेगा."

शहनाज़ ताबेदार ने बताया कि उनका परिवार बहुत गरीब था, इसीलिए बेटियों को स्कूल से निकाल लिया गया. माँ की तमन्ना है कि बेटियाँ वापस पढ़ने जाएं."

गर्व है बेटियों पर

सानिया और मुकद्दस के पिता को बेटियों पर गर्व है.

पाकिस्तान एक धार्मिक रूढ़िवादी देश है लेकिन सानिया और मुकद्दस के पिता ने बताया कि उन्हें किसी प्रकार की आलोचना सुनने को नहीं मिली.

वो कहते हैं, "मेरी बेटियों ने वो किया है जो कई लड़कियां नहीं कर पातीं. उनके लिए मुश्किल होने के बावजूद उन्होंने मेहनतकर अंग्रेज़ी में गाना गाया."

सानिया और मुकद्दस पूरी दुनिया की यात्रा करना चाहती हैं. वो कहती हैं, "हमारी सबसे बड़ी इच्छा है कि हम जस्टिन बीबर से मिलें और उनके साथ गा सकें."

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