'टाडा' के तहत दोषों से टुंडा हुए बरी

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दिल्ली की एक अदालत ने लश्कर-ए-तैयबा के कथित बम विशेषज्ञ अब्दुल करीम टुंडा को आंतकरोधी क़ानून यानी टाडा के तहत दोषी ठहराए जाने के मामले में बरी कर दिया है.

टुंडा को ये सज़ा साल 1994 के एक मामले में टाडा के तहत सुनाई गई थी और वो इस समय दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद हैं.

दिल्ली पुलिस ने उन्हें अगस्त 2013 में भारत-नेपाल सीमा से गिरफ़्तार किया था.

अदालत के इस फ़ैसले के बाद भी उनकी रिहाई नहीं हो सकेगी क्योंकि उनके ख़िलाफ़ कई और मामले भी चल रहे हैं.

उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ियाबाद ज़िले के पिलखुवा के रहने वाले टुंडा उन बीस चरमपंथियों की सूची में शामिल हैं, जिनके प्रत्यर्पण की मांग भारत ने पाकिस्तान से साल 2001 में भारतीय संसद पर हमले के बाद की थी.

इस सूची में लश्कर के प्रमुख हाफ़िज़ सईद और जैश-ए-मौहम्मद के प्रमुख मौलाना अज़हर मसूद अलवी भी हैं.

टुंडा पर भारत में लश्कर के सेल बनाने में भूमिका निभाने का आरोप है. उन पर पाकिस्तान और बांग्लादेश में लश्कर के सदस्यों को बम बनाने में प्रशिक्षण देने का भी आरोप है.

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