कैसे पड़ी 'आप' में दरार

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आम आदमी पार्टी के नेता योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण ने बुधवार को पार्टी के कार्यकर्ताओं के नाम एक खुली चिट्ठी लिखकर उनपर दिल्ली चुनाव में पार्टी को हराने की कोशिश करने के आरोप का जवाब दिया है.

आम आदमी पार्टी के नेताओं मनीष सिसोदिया और पार्टी नेताओं गोपाल राय, पंकज गुप्ता और संजय सिंह मंगलवार को जारी एक बयान में कहा था कि यादव और भूषण ने दिल्ली चुनावों के दौरान पार्टी को हराने के प्रयास किया था.

इन नेताओं ने कहा कि यादव और भूषण को इसीलिए राजनीतिक सलाहकार समिति (पीएसी) से निकालने के फ़ैसला लिया गया.

यादव और भूषण ने अपने पत्र में पार्टी में मतभेद होने के कई कारण बताएँ हैं:

पढ़ें पत्र में बताए गए 5 प्रमुख कारण

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  1. लोक सभा चुनाव के नतीजे आने के बाद अरविंद केजरीवाल ने कांग्रेस के साथ मिल कर दिल्ली में सरकार बनाने का प्रस्ताव रखा. योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण ने इसका विरोध किया और दोनों धड़ों में मतभेद की बुनियाद इसी मुद्दे पर पड़ी.
  2. लोक सभा चुनाव के बाद मनीष सिसोदिया, संजय सिंह और आशुतोष ने मांग उठाई कि हार की जिम्मेवारी लेते हुए पीएसी के सभी सदस्य अपना इस्तीफा अरविन्द को दे दें ताकि वे नई समिति का गठन कर सकें. इसका विरोध नहीं किया जाता तो आम आदमी पार्टी भी दूसरे दलों की तरह हो जाती.
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    राष्ट्रीय कार्यकारिणी में बहुमत की राय थी कि राज्यों में चुनाव लड़ने का फैसला राज्य इकाइयों पर छोड़ देना चाहिए. अरविन्द केजरीवाल ने इसका विरोध किया और उन्होंने किसी भी राज्य में चुनाव प्रचार नहीं करने की धमकी दी. पार्टी ने फ़ैसला पलट दिया. क्या पार्टी में राज्यों की स्वायतता का सवाल उठाना गलत है?
  4. पार्टी में एक कार्यकर्ता पर आरोप लगा कि वो लोगों को एसएमएस भेजकर बीजेपी में शामिल होने को कह रहे हैं. लेकिन भूषण ने जब जांच की तो पाया कि आरोप ग़लत है. मगर कुछ लोगों ने कहा कि भूषण ने जांच में तरफ़दारी की है. भूषण पर ‘आवाम’ की तरफदारी का आरोप भी लगाया गया. पत्र में कहा गया है कि अगर कोई कार्यकर्ता अनुशासन समिति में अपील करे तो उसकी निष्पक्ष सुनवाई होनी चाहिए या नहीं?
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    दिल्ली चुनाव के लिए उम्मीदवारों का चयन होते समय पुराने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की गई और वैसे लोगों को टिकट दिए गए जिनपर संगीन आरोप थे. जिसका विरोध दोनों नेताओं ने किया था. इन्होंने कहा कि सभी उम्मीदवारों की जानकारी जनता को दी जाए और पीएसी में सभी नामों पर चर्चा हो, यह पार्टी के कई लोगों को पसंद नहीं था.

राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के प्रस्ताव

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योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण ने पत्र में 26 फरवरी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में रखे प्रस्तावों के बारे में भी बताया है.

  1. पार्टी से मांग की गई कि नैतिक मूल्यों की रक्षा के लिए एक समीति बने, जो दो करोड़ वाले चेक और पार्टी उम्मीदवार पर शराब रखने के लगे आरोप की जांच करे.
  2. राज्य इकाइयों को स्थानीय निकाय के चुनाव से जुड़े फ़ैसले खुद लने की छूट हो.
  3. पार्टी के संस्थागत ढाँचे, आतंरिक लोकतंत्र का सम्मान हो और पीएसी और राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठकें नियमित और विधिवत हों.
  4. पार्टी के निर्णयों में कार्यकर्ताओं की आवाज़ सुनने और उसका सम्मान करने की पर्याप्त व्यवस्था हो.

इसके साथ ही उन्होंने कई गंभीर आरोप लगाते हुए उम्मीद जताई है कि अरविंद केजरीवाल दिल्ली लौट कर इन मुद्दों पर पार्टी को जवाब देंगे.

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