मनमोहन सिंह को क्यों मिला समन?

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सीबीआई की एक विशेष अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को कोयला खदान के आवंटन में हुए कथित घोटाले से जुड़े एक मामले में तलब किया है.

इसमें कुल मिलाकर छह लोगों समन जारी किया गया है जिनमें मनमोहन सिंह के अलावा पूर्व कोयला सचिव पीसी पारेख और उद्योगपति कुमारमंगलम बिरला भी शामिल हैं.

घोटाले में कंपनी के अधिकारी शुभेंदु अमिताभ और डी भट्टाचार्य के नाम भी शामिल हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय के दो अधिकारियों से भी सीबीआई ने पूछताछ की है.

पढ़िए क्या है पूरा मामला

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यह मामला 2005 का है जब मनमोहन सिंह के पास कोयला मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार था.

इसी दौरान बिरला की कंपनी हिंडाल्को को ओडिशा के तालाबीरा में दो कोयले के ब्लाक आवंटित किये गए थे. इससे पहले यह कोयले के ब्लाक सार्वजनिक क्षेत्र की निवेल्ली लिग्नाईट कार्पोरेशन के पास थे.

पिछले साल दिसंबर माह में ही सीबीआई की विशेष अदालत ने मनमोहन सिंह के बयान को दर्ज करने का निर्देश जारी किया था. जांच एजेंसी ने दिसंबर माह में ही इस कोयले के ब्लाक के आवंटन की तफ्तीश की आख़िरी रिपोर्ट अदालत को सौंप दी थी.

मगर जांच एजेंसी की रिपोर्ट को अदालत ने खारिज करते हुए मनमोहन सिंह के बयान को दर्ज करने का निर्देश भी जारी किया था. एजेंसी का कहना था कि उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री से पूछताछ की इजाज़त नहीं मिली थी.

कांग्रेस की प्रतिक्रिया

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कांग्रेस पार्टी मनमोहन सिंह के बचाव में उतरी और पार्टी के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने एक संवाददाता सम्मलेन को सम्बोधित करते हुए कहा कि सिर्फ समन भेजे जाने से कोई दोषी नहीं हो जाता. वहीं मनमोहन सिंह का कहना था कि वो इस मामले में कानूनी प्रक्रिया से गुजरने के लिए तैयार हैं.

मनमोहन सिंह की सरकार में मंत्री रहे कपिल सिब्बल ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि क़ानून की अपनी प्रक्रिया है जिसका सम्मान किया जाना चाहिए.

दूसरी तरफ पूर्व कोयला सचिव पीसी पारेख ने कहा कि हिंडाल्को को खदान के आवंटन में कुछ ग़लत नहीं हुआ है.

मामले के सभी आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, आपराधिक विश्वासघात और भ्रष्टाचार निरोधी कानून (पीसीए) के तहत आरोप लगाए गए हैं.

"कांग्रेस के पाप की कीमत"

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पूर्व प्रधानमंत्री को जारी किए गए समन पर भारतीय जनता पार्टी के नेता प्रकाश जावडेकर का कहना था कि मनमोहन सिंह को 'कांग्रेस के पाप' की कीमत चुकानी पड़ रही है."

जावडेकर का कहना था कि जो राजनीतिक दल कांग्रेस के साथ खड़े नज़र आ रहे हैं उन्हें भी आत्ममंथन करना चाहिए. उन्होंने कहा, "'यह कांग्रेस का घोटाला है और कांग्रेस के पापों के कारण अर्थशास्त्री व पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को इसका सामना करना पड़ रहा है.''

इस मामले पर नज़र रख रहे पत्रकार राजीव रंजन झा कहते हैं कि इस मामले में राजनीतिक रूप से कांग्रेस की छवि तो धूमिल हुई है मगर उनका कहना है कि सीएजी के मामले में भी मनमोहन सिंह ने कहा था कि उनके पास जितनी भी जानकारी है वो उसे अदालत के सामने रखेंगे.

झा कहते हैं, "इस बार भी उन्होंने ऐसा ही किया है. अब तो सबकुछ अदालत पर ही निर्भर करता है "

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