'मैं सुज़ैट हूँ, रेप विक्टिम नहीं'

कोलकाता में 2012 में गैंगरैप का शिकार हुई सुज़ैट जॉर्डन की मौत हो गई है.

वर्ष 2013 में बीबीसी संवाददाता रूपा झा ने सुज़ैट जॉर्डन ने बात की थी जब बलात्कार की घटना के बाद उन्होंने अपनी पहचान उजागर की थी.

पढ़िए 2013 की रिपोर्ट के अंश

"मेरा नाम सुज़ैट जोर्डन है. अब से मुझे पार्क स्ट्रीट की बलात्कार पीड़िता कहकर न बुलाएं"... कोलकाता से फोन पर सुज़ैट ने जब ये बात कही तो उनकी आवाज़ से छलक रहे आत्मविश्वास को महसूस किया जा सकता था.

सुजै़ट जोर्डन अपनी पहचान दुनिया से दोबारा करवा रही हैं.

इमेज कॉपीरइट AP

उन्हें लगातार कोलकाता के पार्क स्ट्रीट की बलात्कार पीड़िता के नाम से ही जाना जा रहा था.

इतने महीनों के बाद इस फैसले की वजह?

जवाब में वह कहती हैं, "मैं थक चुकी हूँ समाज से, दुनिया के उसूलों से... अब किसी बात का फर्क नही पड़ता है. औरतों पर कितनी हिंसा हो रही है लेकिन कोई बोलने वाला नहीं है. हम सब डरते हैं. मेरी पहचान मेरे मां बाप ने दी है और मुझे इस पर गर्व है. मैं अपने आप को सम्मान देना चाहती हूँ इसीलिए निकलकर बाहर आई हूँ."

पढ़ेंः एक नई सुपरहीरो: बलात्कार पीड़िता प्रिया

ज़िंदगी बदल गई

फोन पर बातें करते हुए सुज़ैट की तस्वीर मेरी आंखों के सामने उतर रही थी. 38 साल की महिला, दो बेटियों की माँ. पति से 11 साल पहले अलगाव हो गया था. वह अपने मां-बाप के साथ कोलकाता में रहती हैं.

फ़रवरी की उस रात वे कोलकाता के एक जाने माने नाइट क्लब से निकलीं. उस क्लब में उनकी दोस्ती जिस व्यक्ति से हुई उसने सुज़ैट के सामने उसे घर छोड़ने का प्रस्ताव रखा. जिस गाड़ी में वे बैठी थीं उसमे और भी लोग थे.

सुज़ैट का आरोप है कि चलती कार में पूरी रात उनका बलात्कार किया गया. उन लोगों ने तड़के सुज़ैट को गाड़ी से बाहर फेंक दिया.

पढ़ेंः क्या पिता ने नाम ज़ाहिर करने की इजाज़त दी?

इमेज कॉपीरइट

उसके बाद उनकी जिंदगी वैसे ही बदल गई जैसे अमूमन ऐसी हिंसा के बादभारतीय समाजमें बदलती है.

'बलात्कार को न्यौता'

"मैं जहां रहती थी, उस घटना के बाद मुझे वो घर छोड़ना पड़ा. लोग मुझ पर ताने मारते थे और मेरी बच्चियों को भी ये सब सुनना पड़ता था. मैंने उस घटना को किसी से छिपाकर नहीं रखा था. उस हादसे के बाद जब मेरे पुरूष मित्र घर आते थे, तो मेरे मोहल्ले के लोग मेरे बारे में बुरी-बुरी बातें करते थे."

अपना दर्द बयान करते हुए उन्होंने कहा, "चूंकि उस रात मैं डिस्को से निकली थी तो मुझे ही इसबलात्कारका दोषी जैसा महूसस कराया जा रहा था. जैसे मैंने ही बलात्कार को न्यौता दिया था. मुझे वेश्या तक बुलाया गया. मैं पूरी तरह टूट चुकी थी."

सुज़ैट बहुत सारी बातें बहुत जल्दी करना चाहती हैं. ऐसा लगा कि एक सांस में पिछले 15 महीनों की छटपटाहट बाहर लाना चाहती हैं.

कहती हैं कि वे लोगों के रवैये से इतनी परेशान हो गई थीं कि कई बार आत्महत्या तक की सोची, लेकिन उनकी बच्चियों ने उन्हें हमेशा रोक लिया.

पढ़ेंः डॉक्यूमेंट्री विवादः क्या कहती हैं बलात्कार पीड़िता?

"मैं आज भी बाहर निकलती हूं तो डर लगता है लेकिन उस डर को जीतना चाहती हूं और उसी कोशिश में जब दूसरी औरतों की मदद करने के लिए सरवाइवर्स फॉर विक्टिम्स ऑफ़ सोशल जस्टिस नाम की हेल्पलाइन में काम करना शुरू किया तो ऐसा लगा कि मेरा दर्द साझा हो गया है."

मर्दों पर भरोसा?

लेकिन वो कौन सा लम्हा था जब सुज़ैट ने पार्क स्ट्रीट रेप विक्टिम की पहचान को हमेशा के लिए मिटा देने का फैसला लिया.

इमेज कॉपीरइट AP

"इस रेप विक्टिम की पहचान के साथ मैं बिल्कुल नहीं रह सकती थी. मैं अपनी बच्चियों के साथ सर उठाकर जीना चाहती हूं. जब पिछले दिनों एक वैसी लड़की के मां बाप से मुलाकात हुई जिसके साथ बलात्कर कर उसे मार दिया गया था, मेरे अंदर सबकुछ जम गया..बर्फ की सिल्ली की तरह. आखिर हम क्यों नहीं सामने आते हैं. अपना चेहरा क्यों नहीं दिखलाना चाहते हैं."

मैंने तय किया मुझे अपना सम्मान और अपनी पहचान वापस चाहिए और फिर सब कुछ आसान हो गया."

पढ़ेंः बलात्कार पीड़ित का भेदभाव का आरोप

बलात्कार के इस मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ये कहकर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था कि ये उनकी सरकार को बदनाम करने के लिए मन से गढ़ी गई घटना है.

सुज़ैट ऐसे राजनीतिक विवादों और बयानबाजी से अलग रहना चाहती हैं.

भरोसा

इमेज कॉपीरइट Sudhiti Naskar

क्या मर्दों पर भरोसा अब भी करती हैं?

पढ़ेंः भारत में बलात्कार पर चुप्पी के 5 कारण

मेरे इस सवाल पर ठहाके लगाकर हंसती सुज़ैट कहती हैं, "अगर ये सवाल एक औरत ने एक औरत से पूछा है तो जवाब है नहीं."

"मुझे पता है माफ कर आगे बढ़ना ही मेरा मरहम है, पर मेरा दिल इसकी गवाही नहीं देता."

बातचीत के आख़िर में सुज़ैट कहती हैं, "मेरी तस्वीर को धुंधला मत करना, न ही मेरी आवाज़ को बदलना... मैं सुज़ैट जोर्डन हूं. पार्क स्ट्रीट रेप विक्टिम नहीं. इसी पहचान के साथ सर उठाकर जीना चाहती हूं."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकतें हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार