औरतों पर नेताओं के 5 विवादित बयान

संसद में जदयू नेता शरद यादव के दक्षिण भारतीय महिलाओं के रंग और शरीर की बनावट के बारे में टिप्पणी पर विवाद शुरू हो गया.

लेकिन ये पहला मामला नहीं है जब किसी राजनेता ने ऐसा बयान दिया हो जिसे महिला विरोधी माना गया.

कुछ दूसरे नेताओं के विवादित बयानों पर एक नज़र डालें.

मोहन भागवत, आरएसएस प्रमुख

भारत में बलात्कार बढ़ने को लेकर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था, "बलात्कार पाश्चात्य सभ्यता का दुष्प्रभाव है और इसीलिए शहरी इलाकों में ज़्यादा होता है. हमारे गांव जहां राष्ट्रीय भावना प्रबल होती है वहां बलात्कार नहीं होते हैं."

मुलायम सिंह यादव, समाजवादी पार्टी प्रमुख

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में एक रैली को संबोधित करते हुए सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने बलात्कार विरोधी क़ानून को गलत बताया था.

यादव ने कहा था, "जब लड़के और लड़कियों में कोई विवाद होता है तो लड़की बयान देती है कि लड़के ने मेरा बलात्कार किया. इसके बाद बेचारे लड़के को फांसी की सज़ा सुना दी जाती है. बलात्कार के लिए फांसी की सज़ा अनुचित है. लड़कों से गलती हो जाती है."

जितेंद्र छत्तर, खाप पंचायत नेता, हरियाणा

समाज में बढ़ती बलात्कार की घटनाओं पर पूछे गए सवाल पर हरियाणा की एक खाप पंचायत के नेता जितेंद्र छत्तर ने कहा था, "मेरे ख़्याल से फास्ट फूड खाने से बलात्कार की घटनाएं बढ़ती हैं. चाऊमीन खाने से शरीर के हार्मोन में असंतुलन पैदा होता है. इसी वजह से इस तरह के कार्य करने का मन करता है."

शीला दीक्षित, पूर्व मुख्यमंत्री, दिल्ली

इमेज कॉपीरइट AFP

पत्रकार सौम्या विश्वनाथन की हत्या के बाद एक सवाल के जवाब में दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने कहा था, "महिलाओं को ज़्यादा एडवेंचर्स नहीं होना चाहिए."

साक्षी महाराज, सांसद, भाजपा

मेरठ में एक रैली को संबोधित करते हुए भाजपा सांसद साक्षी महाराज ने कहा था, ''हिंदुत्व की रक्षा के लिए हर हिंदु महिला को कम से कम चार बच्चे पैदा करने चाहिए.''

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित इंटरनेट लिंक

बीबीसी बाहरी इंटरनेट साइट की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है