'भारत पुलिस स्टेट नहीं, पाकिस्तान नहीं..'

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कांग्रेस के नेता ग़ुलाम नबी आजाद ने संसद में सरकार पर विपक्ष को डराने-धमकाने का आरोप लगाया.

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की कथित जासूसी के मुद्दे पर आज़ाद ने राज्यसभा में कहा, "ये सरकार जासूसी करके हुकूमत चलाना चाहती है. भारत पुलिस स्टेट नहीं है. ये पाकिस्तान की तरह स्टेट नहीं है, जहाँ कोई भी किसी को अंदर डाल देगा."

राहुल गांधी के घर पर जाकर पुलिस अधिकारियों के पूछताछ करने को कांग्रेस ने नेता की निजता का उल्लंघन बताया.

विपक्ष ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पहले धार्मिक आज़ादी पर लगाम लगाई जा रही थी, अब राजनीतिक आज़ादी में भी कटौती की जा रही है.

अन्य विपक्षी दलों ने भी राहुल गांधी की कथित जासूसी और संबंधित मुद्दों पर संसद में सरकार से जवाब मांगा.

उधर सरकार की ओर से जवाब देते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि सांसद सुरक्षा विशेषज्ञ नहीं हैं और उन्हें ये मामले सुरक्षा एक्सपर्ट्स पर छोड़ देने चाहिए.

'पहले भी हुई थी जासूसी'

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जनता दल यूनाईटेड के सदस्य केसी त्यागी ने कहा कि इमरजेंसी के दिनों में भी इस तरह की जासूसी की गई थी और आज एक बार फिर वैसा हो रहा है. यह ग़लत है अौर सरकार को इसे तुरंत रोकना चाहिए. दूसरे दलों के लोगों ने भी कहा कि गृहमंत्री सदन में आकर जवाब दें.

वित्तमंत्री अरुण जेटली ने सरकार की ओर से इस पर जवाब देते हुए जासूसी के आरोपों का ज़ोरदार शब्दों में खंडन किया.

'कांग्रेस के समय शुरूआत हुई'

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वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि पुलिस राजनेताओं का प्रोफ़ाइल तैयार करती है और उसे बीच बीच में अपडेट करती रहती है. यह सुरक्षा के कारणों से किया जाता है और एक सामान्य प्रक्रिया है.

वित्तमंत्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि सोनिया गांधी का प्रोफ़ाइल 2004 में और प्रणव मुखर्जी का प्रोफ़ाइल 2001 मे तैयार किया गया.

जेटली के मुताबिक़, इस प्रक्रिया की शुरुआत 1987 में की गई जब कांग्रेस की सरकार थी और वर्ष 1990 से इसे नियमित किया जाता रहा है.

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उन्होंने इस पर ज़ोर दिया कि यह राजनीतिक कारणों से नहीं किया जाता है और इसका मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए.

पर सरकार के जवाब से कांग्रेस के सदस्य संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने राज्यसभा से वॉकआउट कर दिया.

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