इस कवि सम्मेलन में सिर्फ़ महिला कवि

एमिली वीज़मन

"अगर कोई लड़की गाड़ी चलाती है तो उसकी गाड़ी के पीछे कोई न कोई हॉर्न बजाता रहता है. पर जो हॉर्न बजाता है, वही सड़क दुर्घटना का जन्मदाता होता है न कि वो लड़की."

ये कहना था एक कवी ओंड्रेला का.

बीते शनिवार को राजधानी दिल्ली में 'स्पोकन वर्ड पोयट्री' का आयोजन हुआ. ये कविताओं का कार्यक्रम था.

ये कार्यक्रम सिर्फ़ और सिर्फ़ महिलाओं के लिए था. यहां अमरीका, मलेशिया और नेपाल से कई कवयित्रियों ने हिस्सा लिया.

ब्रिंग बैक द पोएट्स

'ब्रिंग बैक द पोएट्स' दिल्ली का एक ऐसा ही ग्रुप है.

इसी ग्रुप की एक सदस्य हैं अदिति. उन्होंने ही ये ग्रुप बनाया है. पर कविताएं ही क्यों?

अदिति कहती हैं, "मैं कविता के माध्यम से समाजिक जागरूकता फैलाना चाहती थी. बहुत सारे नए ग्रुप भी आ चुके हैं पर हमारा मक़सद है कि किस तरह महिलाओं से जुड़ी सेकशुअलिटी के प्रश्नों को, उससे जुड़े मुद्दों को कविताओं के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया जाए."

वो बताती हैं, "कुछ कवि समलैंगिक और ट्रांसजेंडर हैं. वो महिलाओं से जुड़ी सेकशुएलिटी पर पहले से ही काम कर रहे हैं."

शूर्पणखा पर भी कविता

21 साल की रिया अम्बेडकर यूनिवर्सिटी से जेंडर स्टडीज़ पर काम कर रही हैं. उन्होंने इस मंच पर रामायण की एक अपनी रचना पेश की.

शूर्पणखा सीता से कहती है, "मेरी प्रेम कहानी किसी दूसरी प्रेम कथा के ही जैसी है. मुझे तुमसे प्यार हुआ और तुम्हें मुझसे."

"तुमने मुझे देखा और मैंने तुम्हें. मुझे प्यार से तुमने 'मिनाक्षी' कहा और कहा कि मेरी आंखें मछली जैसी हैं और मैं वहां खड़ी रही शर्मिंदा होकर."

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Image caption वेस्ट बंगाल में नन के बलात्कार का विरोध करते लोग.

उन्होंने अपनी इस रचना के बारे में कहा, "ये कविता मैंने तब लिखी जब दिल्ली में रामायण की बहुत चर्चा हो रही थी और कहा जा रहा था कि रामायण के 300 अलग अलग संस्करण हैं. मैंने उनमें से बहुत सारे पढ़े पर शूर्पणखा मेरी पसंदीदा चरित्र है लेकिन उसपर कभी बात नहीं होती है. इसीलिए मैंने सोचा कि क्यों न कुछ ऐसा लिखूं जिसमें शूर्पनखा की बात हो."

आजकल बलात्कार और उत्पीड़न के मामले काफ़ी बढ़ गए हैं. इस पर रिया कहती हैं, "हम बलात्कार के आरोपियों के बारे में तो बात करते हैं पर उस लड़की या औरत के बारे में बात नहीं करते जिसके परिजन उसके साथ कई सालों से ग़लत काम कर रहे हैं. हम सबको अपने गिरेबान में झांकने की ज़रुरत है."

चाहे वो बलात्कार हो, औरतों का गाड़ी चलाना या फिर द्रौपदी की बात, इस मंच पर औरतों ने बहुत कुछ कहा. उम्मीद है कि इसका संदेश उन लोगों तक पहुंचे जिन्हें इनकी ज़रुरत है.

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