भगत सिंह के गाँव पहुँचकर अन्ना रो पड़े

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समाजसेवी अन्ना हज़ारे सोमवार को भारत के स्वतंत्रता के लिए लड़ने वाले भगत सिंह के पैतृक गाँव खटकर कलां पहुँचकर रो पड़े.

ब्रितानी शासन के ख़िलाफ़ विद्रोह करने वाले भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को 23 मार्च, 1931 को लाहौर में फांसी दी गई थी.

भगत सिंह के गाँव में अन्ना हज़ारे ने कहा, "आज पूरा देश भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव जैसे लाखों लोगों को याद कर रहा है जिन्होंने देश की आज़ादी के लिए कुर्बानियां दीं. लेकिन कुछ गद्दार देश के लिए कुर्बानी देने वाले इन लोगों को भूल गए हैं."

अन्ना ने यह भी कहा कि भले ही कुछ लोग रास्ता भटक गए हों लेकिन कई युवक इन शहीदों को याद करके अपने जीवन में कुछ ना कुछ करते हैं.

'नशे के ख़िलाफ़ अभियान'

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Image caption भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को 23 मार्च 1931 को लाहौर में फांसी दी गई थी.

अन्ना हज़ारे रविवार शाम को ही जालंधर पहुँच गए थे. सोमवार सुबह वो अपने समर्थकों के साथ पदयात्रा करके भगत सिंह के गाँव पहुँचे.

इस दौरान अन्ना ने पंजाब में बढ़ती नशाखोरी को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए उन्होंने नशाखोरी के ख़िलाफ़ अभियान चलाने का वादा किया.

23 मार्च को फांसी दिए जाने के बाद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु का हुसैनीवाला में अंतिम संस्कार कर दिया गया था.

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