मोदी की नकल कर रहे हैं अखिलेश यादव?

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कहते हैं कि युवाओं में कुछ अलग और नया सोचने की क्षमता बड़ों से ज़्यादा होती है. लेकिन उत्तर प्रदेश के प्रबुद्ध वर्ग को लगता है कि युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव इस बात को ग़लत साबित करने में लगे हुए हैं.

'पेपरलेस ऑफिस', 'स्वच्छता अभियान', 'मेक इन इंडिया' या 'मन की बात' जैसे कार्यक्रमों की बात हो, अखिलेश यादव प्रधानमंत्री की योजनाओं को समाजवादी जामा पहना कर गौरवान्वित महसूस करते हैं.

समाजवादी पार्टी इसे विपक्ष का दुष्प्रचार क़रार देती है. पार्टी के प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी कहते हैं कि मुख्यमंत्री किसी की नकल नहीं कर रहे हैं.

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समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी कहते हैं, "उत्तर प्रदेश में स्वच्छ और हरित का नारा मोदी के प्रधानमंत्री बनने से पहले से चल रहा है. मोदी मन की बात करते हैं, लेकिन मुख्यमंत्री जन की बात करते हैं, और संवाद करते हैं. उनको नकलची कहना दुष्प्रचार है."

लखनऊ विश्वविद्यालय के राजनीति शास्त्र के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफ़ेसर एसके द्विवेदी की नज़र में अखिलेश यादव का मुख्य लक्ष्य 2017 का विधानसभा चुनाव जीतना है.

द्विवेदी के अनुसार, "प्रदेश की क़ानून व्यवस्था सुधारने में वे पूरी तरह से विफल रहे हैं. साथ ही वो ये भी जानते हैं कि जनता नरेंद्र मोदी से बहुत अधिक प्रभावित है."

द्विवेदी के अनुसार, "ऐसे में अखिलेश उनकी नीतियों की नक़ल उतारने में लगे हैं ताकि लोगों में ये धारणा न बन जाए कि समाजवादी पार्टी की सरकार विकास के मामले में पिछड़ रही है."

रेडियो सैफई

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10 जून 2014 को जब प्रधानमंत्री ने केंद्रीय सचिवों और अन्य अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे ज़्यादा से ज़्यादा काम कंप्यूटर पर करके सरकारी दफ्तरों को कागज़-रहित बनाएं.

इसके ठीक तीन दिन बाद अखिलेश यादव ने अपने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे मुख्यमंत्री कार्यालय को कागज़रहित बनाएं ताकि काम में पारदर्शिता लाई जा सके और त्वरित निर्णय लिए जा सकें.

केंद्र सरकार का पता नहीं, लेकिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का कार्यालय अभी भी फाइलों में डूबा हुआ है.

सात नवम्बर 2014 को जब प्रधानमंत्री ने वाराणसी में 'स्वच्छ भारत अभियान' की शुरुआत की तो अखिलेश यादव ने 'स्वच्छ और हरित उत्तर प्रदेश' का नारा दे दिया.

तीन अक्टूबर 2014 को प्रधानमंत्री ने रेडियो पर जनता से 'मन की बात' की. कुछ महीने बीते और जनवरी 2015 में सैफई के लोगों से बात करने के लिए रेडियो सैफई शुरू हो गया.

मन की बात

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रेडियो सैफई की वेबसाइट समाजवादी पार्टी के झंडे की तरह हरा और लाल है. इसके माध्यम से वहाँ के लोगों को सरकार की उपलब्धियों के बारे जानकारी देना ही इसका उद्देश्य है.

इस ऑनलाइन रेडियो का प्रयोग खेती सम्बन्धी जानकारी के लिए भी जाएगा.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री इतने से ही संतुष्ट नहीं रहे.

23 मार्च 2015 को अपने मन की बात कुछ और लोगों तक पहुंचाने के लिए अखिलेश ने घोषणा की कि जिन 15 लाख छात्रों को तीन साल पहले लैपटॉप बांटे गए थे उनसे वे ऑनलाइन रूबरू होकर 'अपने मन की बात' करेंगे.

वोट की राजनीति

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उनके इस पैंतरे को विधान सभा चुनावों के सन्दर्भ में देखा जा रहा है क्योंकि कक्षा 12 के ये छात्र 2017 में वोट करने के हक़दार हो जाएंगे.

प्रधानमंत्री के एक और नारे को अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के परिप्रेक्ष्य में ढाल लिया.

नरेंद्र मोदी ने देश के आर्थिक और औद्योगिक विकास के लिए 'मेक इन इंडिया' का नारा दिया तो 11 मार्च 2015 को अखिलेश ने विधानसभा में कहा कि इसी तर्ज़ पर 'मेक इन यूपी' होना चाहिए. उन्होंने केंद्र सरकार से उम्मीद की है कि वो उद्योगों को उत्तर प्रदेश में उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहित करें.

भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने कहा कि "अच्छी नीतियों का अनुसरण करने में कोई बुराई नहीं है. लेकिन एक तरफ आलोचना और दूसरी तरफ अनुसरण, ये नहीं होना चाहिए."

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विजय बहादुर पाठक कहते हैं, "मोदी के स्वच्छता अभियान पर आज़म खान कहते हैं कि बादशाह ने झाड़ू पकड़ा दी. लेकिन मुख्यमंत्री स्वच्छ और हरित यूपी की बात करते हैं. मुख्यमंत्री गुजरात की वैसे तो आलोचना करते हैं, लेकिन चाहते हैं कि प्रवासी भारतीय उत्तर प्रदेश में आएं."

पाठक कहते हैं ये अच्छी बात है कि मुख्यमंत्री को प्रधानमंत्री की नीतियां भा रही हैं, उनको ये नहीं लगना चाहिए कि वे उनकी नकल कर रहे हैं.

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