राधा, मीरा और उर्मिला की भाव भंगिमाएं...

शास्त्रीय नृत्य और संगीतमय प्रस्तुति 'स्त्री' इमेज कॉपीरइट Other

पिछले दिनों दिल्ली में मुद्रा क्लासिकल डांस सोसाइटी ने लेडी श्री राम कॉलेज की छात्राओं के साथ 'श्री' नाम से क्लासिकल डांस और म्यूजिकल प्रोग्राम का आयोजन किया गया.

इस डांस प्रोग्राम को इन छात्राओं ने मशहूर कथक नृत्यांगना विधा लाल के मार्गदर्शन में तैयार किया.

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'श्री' डांस परफॉर्मेंस में स्त्री के विभिन्न पौराणिक रूपों और भावों को चार महत्वपूर्ण शास्त्रीय नृत्यों की विभिन्न शैलियों में प्रस्तुत किया गया.

विधा लाल ने राधा (सत्रिया नृत्य), द्रौपदी (भरतनाट्यम), मीरा (कथक), उर्मिला (ओडिसी) के माध्यम से विभिन्न स्त्री रूपों को दिखलाया.

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कार्यक्रम की शुरुआत अमर संगम और उनके समूह ने संगीत प्रस्तुति से की. अमर संगम ने गिटार पर एकल प्रस्तुति दी. वे संगीत की दुनिया का जाना पहचाना नाम हैं.

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अमर संगम कोक स्टूडियो से भी जुड़े रहे हैं. वे जगजीत सिंह, आबिदा परवीन, पंडित ज्वाला प्रसाद और अन्य कई संगीतकारों के साथ कार्यक्रम कर चुके हैं.

इस म्यूजिकल प्रेजेंटेशन के बाद प्रसिद्ध सत्रिया डांसर अनीता शर्मा और उनकी बेटी आरही कौशिक ने कार्यक्रम पेश किया.

सत्रिया असम का शास्त्रीय नृत्य है. साल 2000 में इस नृत्य को भारत के आठ क्लासिकल नृत्यों में शामिल होने का गौरव प्राप्त हुआ.

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पिछले कुछ सालों में इस नृत्य को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रूप से काफी सराहना मिली है.

अनीता शर्मा ओडिसी व सत्रिया नृत्य में पारंगत हैं लेकिन साल 2000 से उन्होंने पूरी तरह से सत्रिया नृत्य के प्रचार पर ही अपना ध्यान केंद्रित किया है.

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उनकी बेटी आरही ओडिसी व सत्रिया की कुशल नृत्यांगना भी हैं. इस खूबसूरत युगलबंदी के बाद लेडी श्री राम कॉलेज की छात्राओं ने 'श्री' की खास प्रस्तुति दी.

आरही बताती हैं, "क्लासिकल डांस के जरिए स्त्री शक्ति को दर्शाने वाले एक परफॉर्मेंस के बारे में काफी समय से विचार चल रहा था. फिर ख्याल आया कि क्यों न शास्त्रीय नृत्यों को मिलाकर ही एक डांस परफॉर्मेंस तैयार किया जाए.

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आरही कौशिक कहती हैं वे विधा लाल की नृत्य शैली से काफी प्रभावित रही हैं.

आरही के सुझाव पर विधा ने 'श्री' की कोरियोग्राफी की जिसमें 21 वीं सदी के पौराणिक स्त्री पात्रों को शामिल किया.

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सत्रिया नृत्य में मीरा का श्री कृष्ण के प्रति समर्पण दर्शाया तो भरतनाट्यम के जरिए द्रौपदी के जीवन पर प्रकाश डाला.

उर्मिला की कहानी को ओडिसी नृत्य शैली के जरिए सुनाया और वहीं राधा की भावनाओं को कथक के माध्यम से दर्शकों तक पहुंचाया.

अंत में इन सभी नृत्य शैलियों को एक सूत्र में पिरोकर चित्रांगदा के किरदार को पेश किया.

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अंत में विधा लाल की खूबसूरत कथक प्रस्तुती ने इस शाम को और भी खूबसूरत बना दिया.

गिनीस बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में विधा लाल का नाम एक मिनट में 103 चक्कर लगाने के लिए दर्ज है.

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उन्होंने कथक का प्रशिक्षण अपनी गुरु माँ श्रीमती गीतांजलि लाल से प्राप्त किया है.

विधा के अनुसार जब उनके पास यह प्रस्ताव आया तब वे बड़ी उत्साहित थीं.

वे कहती हैं, "अभ्यास के दौरान डांस की छात्राओं को नृत्य की बारीकियां सिखाने के साथ ही शास्त्रीय नृत्य के महत्व को समझाना अच्छा अनुभव रहा. 'श्री' का उद्देश्य नृत्य और संगीत के माध्यम से देश की अनमोल संस्कृति को आम जन तक पहुँचाना है."

यह कार्यक्रम दिल्ली के इंडिया हैबिटैट सेंटर में पहली अप्रैल को आयोजित किया गया.

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