आपके काम का है एयर क्वालिटी इंडेक्स?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस एयर क्लालिटी इंडेक्स की शुरुआत की है, वो दिल्ली और मुंबई सहित देश के 10 बड़े शहरों में वायु प्रदूषण के बारे में आगाह करेगा.

आने वाले दिनों में सभी राज्यों की राजधानियों को भी इसके तहत लाया जाएगा.

हाल ही के आंकड़ों में पाया गया है कि दिल्ली ने दुनिया के सबसे प्रदूषित शहर बीजिंग को भी पीछे छोड़ दिया है. दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर बीजिंग से भी ढाई गुना है.

इंडेक्स का मक़सद क्या है?

वायु प्रदूषण का मतलब है हवा में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड की मात्रा विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा तय किए गए मापदंड से अधिक होना.

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एयर क्वालिटी इंडेक्स का मक़सद है कि वायु प्रदूषण के सूचकांक को संख्या में परिवर्तित कर लोगों को बताना कि इसका मतलब क्या है.

इससे पता चलेगा कि वायु कितनी शुद्ध या ख़राब है, या फिर बहुत ही खराब है.

इससे लोगों को यह भी बताने में आसानी होगी कि वायु प्रदूषण का स्तर अगर सामान्य है तो क्या करना चाहिए और अगर ख़राब और बहुत ख़राब है तो उसका सेहत पर किस तरह का असर पड़ेगा.

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ये भी बताया जाएगा कि ऐसी सूरत में लोगों को क्या-क्या उपाय करने चाहिए.

प्रदूषण इमरजेंसी के समय क्या होगा?

इस इंडेक्स का दूसरा मक़सद है कि प्रदूषण की इमरजेंसी को भांपना और फौरी उपाय करना.

बीजिंग, पेरिस सहित कई ऐसे शहर हैं जहाँ 'प्रदूषण आपातकाल' घोषित किया जाता है. प्रदूषण आपातकाल का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर बहुत ही ज़्यादा बढ़ा हुआ हो.

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प्रदूषण आपातकाल के दौरान इन शहरों में कुछ देर के लिए उद्योगों को बंद कर दिया जाता है, सड़कों पर डीज़ल की गाड़ियों की संख्या भी कम कर दी जाती है.

यह सब कुछ तब तक होता है जब तक प्रदूषण का स्तर सामान्य ना हो जाए. भारत में इसके बारे में जानकारी ही नहीं रहती है इस लिए यहां ऐसा नहीं हो पाता है.

आगे का रास्ता क्या होगा?

यह जन स्वास्थ्य के लिए लिया गया एक अहम क़दम है जिससे कई शहरों में वायु प्रदूषण पर हमेशा नज़र रखना संभव हो पायेगा.

इससे समय समय पर मीडिया के माध्यम से लोगों तक अलर्ट भेजना संभव हो पाएगा.

वायु प्रदूषण की आकस्मिकता की सूरत में उचित क़दम उठाना संभव हो पाएगा.

अब लोगों के बीच वायु प्रदूषण को लेकर जागरूकता फैलाने में मदद मिल सकेगी.

((बीबीसी संवाददाता सलमान रावी से बातचीत पर आधारित))

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