फर्जी मार्कशीट से बने पंच और सरपंच!

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राजस्थान में पंचायत चुनावों के नतीजे क़रीब दो महीने पहले आ गए थे, लेकिन अब भी कई पंचायतें नए पदाधिकारियों की राह देख रही हैं.

वजह ये है कि पुलिस इन पंचायत पदाधिकारियों की तलाश कर रही है, क्योंकि उनपर चुनाव लड़ने के लिए फर्जी मार्कशीट बनवाने के आरोप हैं.

पंचायत राज कमिश्नर राजेश यादव ने बीबीसी हिन्दी को बताया कि राज्य भर में 17,125 चुने गए विभिन्न पंचायत प्रतिनिधियों में से अब तक 690 के ख़िलाफ़ शिकायतें दर्ज हुई हैं.

राज्य सरकार ने पंचायत चुनाव से पहले एक अध्यादेश जारी कर सरपंचों के लिए आठवीं और ज़िला परिषद सदस्यों के लिए दसवीं पास होना अनिवार्य कर दिया था.

राज्य भर में ऐसे फ़र्ज़ी प्रमाणपत्र बेचने वाले निजी स्कूल संचालकों की धरपकड़ भी जारी है.

कुर्की और धरपकड़

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Image caption दौसा ग्राम पंचायत के हारे हुए उम्मीदवारों के पोस्टर. (इनमें से किसी के नाम मामला दर्ज नहीं है.)

जांच में फ़र्ज़ीवाड़ा सिद्ध होने पर दोषियों को 'अयोग्य' घोषित किया जाएगा और छह महीने के अंदर इन सभी स्थानों पर दोबारा चुनाव कराए जाएंगे.

हालाँकि कई हारने वाले प्रत्याशियों के ख़िलाफ़ भी फ़र्ज़ीवाड़े के मुक़दमे दर्ज हुए हैं.

राजधानी जयपुर के नज़दीक दौसा ज़िले में पुलिस ने एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है, जहां से अन्य ज़िलों के प्रत्याशियों को भी 10 हज़ार से 15 हज़ार रुपए में फ़र्ज़ी दस्तावेज़ बेचे गए.

दौसा पुलिस अधीक्षक अंशुमन भोमिया ने बीबीसी को बताया, "इस ज़िले में अब तक दर्ज 61 मामलों में एक सरपंच और चार निजी स्कूल संचालक गिरफ़्तार हुए हैं. अधिकतर अभियुक्त भूमिगत हो गए हैं और उनके घरों और रिश्तेदारों के यहां छापेमारी हो रही है. अगर ये पुलिस की पकड़ में नहीं आते तो इनकी संपत्ति कुर्क कर इन्हें भगोड़ा घोषित किया जाएगा."

नक़ली प्रमाणपत्र

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दौसा ज़िले के भांडारेज में हारे हुए उम्मीदवार भगवान सहाय कोली कहते हैं, "यहाँ से जीते हुए प्रत्याशी 2011 की जनगणना में प्राथमिक शिक्षा प्राप्त थे पर पंचायत नामांकन के वक़्त आठवीं पास हो गए."

गांव की चौपालों में चर्चा गरम है. कुछ लोग इसे सरकार की ग़लती मानते हैं, कुछ लोग प्रत्याशियों की.

एक ग्रामीण रघुवीर गूजर कहते हैं, "जब बिना पढ़े-लिखे लोग एमएलए और सांसद बन सकते हैं तो सरपंच क्यों नहीं?"

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Image caption राजस्थान के दौसा ग्राम में खेलते बच्चे.

कुछ तर्क देते हैं, "अब हो गया चुनाव तो निरस्त नहीं होना चाहिए", "जब राबड़ी देवी मुख्यमंत्री बन सकती हैं तो सरपंचों पर यह सख़्ती क्यों."

लेकिन कई ग्रामीण चाहते हैं कि मामले में "दूध का दूध और पानी का पानी" हो.

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