जानिए सत्यम घोटाले को 5 बिंदुओं में

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हैदराबाद में आज अदालत ने भारत के सबसे बड़े कार्पोरेट घोटाले सत्यम धोखाधड़ी मामले में फ़ैसला सुनाते हुए सभी अभियुक्तों को दोषी क़रार दिया है.

इस घोटाले में सीबीआई के अनुसार निवेशकों के 14162 करोड़ रुपए डूब गए थे.

यह मामला कभी भारत की चौथे नंबर की सूचना प्राद्योगिकी कंपनी रही सत्यम कंप्यूटर सर्विसेज़ लिमिटेड से जुड़ा है.

कंपनी के चेयरमैन रामलिंगा राजू ने 7 जनवरी 2009 को एक पत्र लिखकर इस घोटाले को कबूल किया था.

भारत के सबसे बड़े घोटाले की अहम बातें:-

1. राजू ने 7 जनवरी 2009 को 7136 करोड़ रुपए के घोटाले की बात स्वीकारी. सीबीआई ने उन पर निवेशकों के 14162 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी के आरोप लगाए. सीबीआई ने दावा किया कि राजू और उनके परिवार ने कई हथकंडे अपनाते हुए अवैध तरीक़े से 2743 करोड़ रुपए अर्जित करने के आरोप लगाए.

2.मामले की सुनवाई 50 महीनों तक चली. इस दौरान तीस महीनों तक राजू, और उनके प्रबंध निदेशक भाई बी रामा राजू ने जेल में बिताए. कंपनी के पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी श्रीनिवास वदलामानी समेत अन्य अधिकारियों पर भी धोखाधड़ी का मामला दर्ज हुआ.

3. इस मामले के बाद भारत के कार्पोरेट क़ानूनों में कई अहम बदलाव किए गए और फ़ैसले के बाद अब और भी बदलाव किए जा सकते हैं.

4. इस घोटाले के बाद भारते में कॉरपोरेट गवर्नेंस शक के दायरे में आ गई. इसके चलते भारत के क़ानूनों में सुधार किए गए और सीईओ, स्वतंत्र निदेशकों और ऑडीटरों को अधिक जवाबदेह बनाया गया.

5. इस घोटाले के चलते भारत सरकार की पूरी दुनिया में साख भी बढ़ी. सरकार ने इस घोटाले के सामने आते ही तेज़ी से कर्मचारियों के हितों को बचाने के लिए कदम उठाए और सत्यम के टेक महिंद्रा द्वारा टेकओवर को पारदर्शी तरीके से सुगम बनाया

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