'पुलिस पीछे हटे तो गाली खाए नहीं तो गोली'

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"लोग अवैध माल ले जाते वक्त गाड़ियों में पत्थर रखकर झुण्ड में चलते हैं और पुलिस द्वारा चेकिंग करने पर हमला करते हैं. हम यदि पीछे हटें तो सबकी गाली खाते हैं और सामना करें तो गोली."

यह कहना है राजधानी जयपुर के नजदीक इलाके में तैनात एक पुलिस वाले का.

अपराधी लाठी-भाले के साथ-साथ बन्दूक से बात करने लगे हैं पर राजस्थान पुलिस के पास इनसे निपटने के लिए न तो पूरे हथियार हैं, न ही कारतूस. लाठियों, हेलमेट और शील्ड्स की भी कमी है.

हाल ही में विधान सभा में पेश नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट (कैग) के अनुसार, पिछले पांच साल में विभाग को करीब 16,000 आधुनिक हथियारों की दरकार थी पर हासिल किये गए मात्र 25 प्रतिशत. इन्हें भी समय पर फ़ील्ड टीमों को नहीं भेजा गया.

संसाधनों की कमी

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Image caption हालांकि भारत में पुलिस बलों को भारी हथियार भी दिए जा रहे हैं.

एक अन्य पुलिस वाले ने कहा कि "अपराधियों के पास तो नए किस्म की गाड़ियाँ, आधुनिक हथियार हैं, फट से बन्दूक तान देते हैं, हम उनका मुकाबला कैसे करें?"

विभाग को 2011 में जबलपुर की गन केरिज फ़ैक्ट्री से 99 बंदूकें मिलीं जिनकी वारंटी एक साल की थी.

विभाग ने इनके लिए रबर के छर्रों का आर्डर एक साल बाद दिया. कारतूस आए तब तक वारंटी ख़त्म हुए दो साल बीत गए. सांप्रदायिक दंगे या राजनीतिक प्रदर्शनों से निपटने के सरंजाम की कमी के साथ करीब 50 प्रतिशत भारी वाहन भी कम हैं.

नव नियुक्त पुलिस महानिदेशक मनोज भट्ट ने बीबीसी को बताया कि उन्होंने जांच कर सभी फ़ील्ड स्टेशसंस पर हथियार और कारतूस उपलब्धता का चार्ट तैयार करवाया है और वर्तमान में ज़मीनी हालत वैसी बिलकुल नहीं है जैसा रिपोर्ट में कहा गया है.

'फ़ंड भी नहीं इस्तेमाल हो पाता'

हालांकि उन्होंने कहा कि हो सकता है कि जिस किसी तारीख़ पर रिपोर्ट के लिए जांच की गई, तब तक वितरण की प्रक्रिया पूरी न हुई हो.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि राजस्थान सरकार ने केंद्र की 'पुलिस की आधुनिकीकरण योजना' का समुचित लाभ नहीं उठाया.

केंद्रीय राशि का 36 से 79 प्रतिशत तक उपयोग नहीं किया गया.

इस पर जोधपुर के सरदार पटेल पुलिस विश्वविद्यालय के कुलपति एमएल कुमावत का कहना है, "चाहे राजस्थान हो या अन्य कोई उत्तर भारतीय प्रदेश, यहाँ से पुलिस की ज़रूरतों और प्रस्तावों को वैसे आगे नहीं बढ़ाया जाता जाता जैसे दक्षिण के राज्य करते हैं और इसीलिए आवंटित बजट का पूरा उपयोग नहीं हो पाता है."

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उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा अब पुलिस आधुनिकीकरण के लिए केंद्र से मिलने वाली राशि की व्यवस्था बंद करने से सब राज्यों में फ़ंड की और भारी कमी आने वाली है.

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