रोहतक ब्रेवहार्ट्स: वीडियो के आगे की कहानी

आरती और पूजा इमेज कॉपीरइट PTI

क़रीब छह महीने पहले, रोहतक की एक बस में एक लड़के पर बेल्ट से वार करतीं दो बहनों का वीडियो अब तक लाखों बार देखा जा चुका है. पर चालीस सेकेंड के उस वीडियो से पूरी बात पता नहीं चलती.

सवाल इतना भर है कि उस दोपहर छेड़छाड़ हुई या नहीं? पर जवाब ढूंढने वाले मीडिया की नज़र रोहतक से हट गई है.

एफ़आईआर तो तभी दर्ज हो गई थी पर पुलिस ने अब तक अदालत को अपनी रिपोर्ट नहीं सौंपी है.

रोहतक पुलिस के एसपी शशांक ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "मीडिया की नज़र होने की वजह से उस दिन बस में मौजूद लोग गवाही देने से बहुत डरे हुए थे. पहचान गुप्त रखे जाने की शर्त पर बहुत मुश्किल से कुछ ने गवाही दी है."

पर हमने पाया कि पहचान ज़ाहिर करने वाले गवाहों की भी कमी नहीं.

गवाह

इमेज कॉपीरइट Manoj Dhaka
Image caption लड़कों के वकील के मुताबिक़, पुलिस पर केस में की गई शुरुआती 'ग़लतियों' का दबाव है.

रोहतक में लड़कों के वक़ील, प्रदीप मलिक के चेम्बर में कई गवाहों के बयान इकट्ठे किए गए हैं.

उस दिन बस में सफ़र कर रहे लोगों के इन लिखित बयानों को दिखाते हुए प्रदीप मलिक बताते हैं कि कई गवाह तो ख़ुद उनके पास चलकर आए.

मलिक ने कहा, "जो वीडियो में नहीं दिखता वो ये बयान बताते हैं, कि लड़कियों ने सीट को लेकर खुद ही झगड़ा किया था."

ये और बात है कि गवाह विमला और एक और गवाह समाकौर के बयान शब्दश: एक ही हैं. सिर्फ ऊपर लिखे नाम और नीचे किए हस्ताक्षर अलग हैं.

बयान

इमेज कॉपीरइट Manoj Dhaka
Image caption लड़कियों के वकील पुलिस पर लड़कों की तरफ़दारी करने का आरोप लगाते हैं.

लड़कियों के वकील अतर सिंह पवार के मुताबिक़, ये गवाह लड़कों की जान-पहचान के लोग हैं और इनके बयान पुलिस जांच में झूठे पाए जाएंगे.

पवार कहते हैं, "तीन महिलाएं जिनके बयान लिए गए, वो उस व़क्त बस में नहीं अपने गांव में थीं. पर जब उस गांव के बुज़ुर्ग इस बात की तसदीक करने आए, पुलिस ने उनके बयान दर्ज नहीं किए."

रोहतक पुलिस इन आरोपों का कोई जवाब नहीं दे रही. एसपी शशांक कहते हैं, "पुलिस पर कोई दबाव नहीं है, सारे बयान ले लिए गए हैं और हमें उम्मीद है कि इस महीने के आख़िर तक पुलिस अपनी रिपोर्ट जमा कर देगी."

सच-झूठ

इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption बस का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने तीनों लड़कों को हिरासत में ले लिया.

इस दौरान दिल्ली की सरकारी लेबोरेट्री में लड़के और लड़कियों का झूठ पकड़ने वाला- लाई डिटेक्टर टेस्ट भी हुआ. लड़कियों के मुताबिक़, इसमें उनसे अभद्र और केस से ताल्लुक ना रखने वाले सवाल पूछे गए.

पर पुलिस इस पर भी तथ्य सामने रखने को तैयार नहीं है. क़ानूनी तौर पर उनपर केस की तहक़ीकात की रिपोर्ट पेश करने का कोई दबाव भी नहीं है.

जब आरोपी हिरासत में हो तो चार्जशीट दो से तीन महीने में दायर करना ज़रूरी होता है. अगर आरोपी ज़मानत पर हों तो इसकी कोई समयसीमा नहीं.

यानि पुलिस के ढूंढे गए सच का इंतज़ार भी अभी बहुत लंबा हो सकता है. पर आरोपी लड़कों और शिकायत करने वाली लड़कियों पर हर दिन भारी पड़ रहा है.

दबाव

इमेज कॉपीरइट Manoj Dhaka
Image caption कुलदीप इस मामले में मुख्य आरोपी हैं.

मुख्य आरोपी कुलदीप कहते हैं, "हर वक्त दिमाग परेशान रहता है कि क्या होगा, अब तक उन्हें फ़ैसला कर देना चाहिए था."

बस में हुई घटना से पहले कुलदीप और दीपक ने सेना में भर्ती का फिज़िकल एग्ज़ाम पास किया था, पर केस शुरू होने की वजह से उन्हें लिखित परीक्षा में नहीं बैठने दिया गया.

वीडियो देखकर कुलदीप की जो छवि उभरती है, अपने गांव में वो उससे बहुत अलग दिखते हैं.

इमेज कॉपीरइट Manoj Dhaka
Image caption दीपक और कुलदीप के मुताबिक़, 'समाज में सिर्फ लड़कियों की सुनी जा रही है.'

बस में बड़े आत्मविश्वास से लड़कियों से निपटते कुलदीप, अपने गांव में सहमे और शांत हैं. बात भी सिर झुकाकर करते हैं.

मैं पूछती हूं कि क्या उस दिन की घटना के बाद लड़के छेड़ते हैं, कि लड़कियों से पिट गए? तो कुलदीप ना में सर हिला देते हैं.

बगल में बैठे दीपक कहते हैं, "हमारे यहां, इस रास्ते पर तो कोई छेड़छाड़ नहीं होती. उस दिन बस वो लड़कियां बिना किसी वजह के उठीं और बेल्ट से मारने लगीं."

डर

इमेज कॉपीरइट Manoj Dhaka
Image caption आरती और पूजा का आरोप है कि सरकार, पुलिस और समाज, इस व़क्त सब उनके ख़िलाफ़ हैं.

रोहतक से क़रीब 45 किलोमीटर दूर है आरती और पूजा का ख़रखोदा गाँव. 28 नवंबर 2014 की उस दोपहर वो ‘गवर्नमेंट कॉलेज फ़ॉर वीमन’ से हरियाणा रोडवेज़ की एक बस पर उसी रास्ते निकलीं थीं.

उसी रास्ते के बीच में पड़ता है कुलदीप, दीपक और मोहित का आसन गाँव. रोहतक के जाट कॉलेज से वो भी घर की ओर निकले थे.

और यहीं से घटना का ब्योरा बदल जाता है. पूजा कहती हैं, "आप वीडियो को शुरू से ध्यान से देखो, वो मेरी बहन को छेड़ रहा था, पीट रहा था, इसीलिए मुझे बेल्ट निकालनी पड़ी."

इमेज कॉपीरइट Manoj Dhaka
Image caption अब पूजा और आरती के साथ सादे कपड़ों में एक महिला पुलिस कॉन्स्टेबल तैनात है.

वीडियो आने के बाद दोनों बहनों को पहले तो जांबाज़ माना गया और हरियाणा सरकार ने उन्हें सम्मान देने का ऐलान भी किया. लेकिन अलग-अलग जानकारी सामने आने पर उसे वापस ले लिया.

आरती कहती हैं, "अगर हमारी सच्चाई सामने आई तो सबको जवाब देना पड़ेगा, मुख्यमंत्री को, पुलिस प्रशासन को, बस इतना डर है कि कहीं इस वजह से सच्चाई को दबा ना दिया जाए."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार