अब पलटवार नहीं करेंगी 'रोहतक ब्रेवहार्ट्स'

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आरती और पूजा, रोहतक की दो बहनें जो एक लड़के को बेल्ट से पीटने के लिए चर्चा में आईं. उन्होंने अब बीबीसी को बताया है कि दोबारा ‘छेड़ी गईं’ तो ऐसा नहीं करेंगी.

पिछले साल हरियाणा के ख़रख़ोदा गांव की इन लड़कियों का वीडियो जब यूट्यूब और मीडिया के ज़रिए दिखाया गया, तब उन्हें ‘जांबाज़’ का नाम दिया गया. लड़कों के ख़िलाफ़ छेड़छाड़ का मामला दर्ज हुआ और तहक़ीक़ात जारी है.

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बीबीसी ने ख़रख़ोदा और आसपास के गांवों की लड़कियों से बातचीत की तो वो अब भी इनकी ‘हिम्मत’ की दाद दे रही हैं. फिर ऐसा बयान क्यों?

क्या बहनें डर गई हैं या उन्हें लगता है कि बेल्ट उठाना सही कदम नहीं था?

छोटी बहन पूजा कहती हैं, “हमने पहले भी ग़लत नहीं सहा और आगे भी नहीं सहेंगे. पर जब हमें कोई लड़का छेड़ेगा तो अपने परिवार की हालत का ख़्याल मन में आ जाएगा और फिर मन नहीं करेगा कि हम ‘रिटालिएट’ करें.”

'मां-बाप को रोते हुए देखा है'

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Image caption आरती और पूजा गवर्मेंट कॉलेज फॉर वुमेन में पढ़ाई कर रही हैं.

रोहतक के एक कॉलेज में बीसीए की पढ़ाई कर रही बहनों में कोई बदलाव नहीं दिखता. उतनी ही हिम्मत और आत्मविश्वास से बात करती हैं, जैसे मीडिया में पहली बार आने पर करती थीं.

पूजा कहती हैं, “मामले का अंतिम फ़ैसला आने तक हम पीछे नहीं हटेंगे.”

पर नाराज़ भी हैं. सम्मान का ऐलान कर उसे वापस लेने वाली सरकार से, लड़कों के साथ समझौता करने का दबाव बनाने वाली पुलिस से और लड़कों पर हाथ उठाने के लिए उन्हें ग़लत समझने वाले समाज से.

पूजा कहती हैं कि इस सब ने उनके मां-बाप पर तरह-तरह के दबाव बनाए.

पूजा के मुताबिक, “पुलिस अधिकारियों ने मेरे पापा से कहा कि कौन शादी करेगा तुम्हारी बेटियों से, क्या इज़्ज़त रह गई है उनकी समाज में. ऐसी बातें सुनकर मेरे मां-बाप रोते नहीं तो और क्या.”

'लड़के कहीं ख़त्म ना हो जाएं'

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Image caption ख़रख़ोदा गांव के पुरुष आरती और पूजा में ज़्यादा दोष देखते हैं.

ख़रख़ोदा गांव में किसी ने वीडियो देखा हो या नहीं, उसके बारे में सुना ज़रूर है. ज़िक्र छिड़ते ही सब आदमी मुस्कुराने लगते हैं, जैसे घर का कोई राज़ बीच चौराहे की चर्चा में आ गया हो.

पूछने पर साफ़ होता है कि लड़कियों के बारे में राय आम है. पठानी कुर्ता पायजामा पहने एक शख़्स के मुताबिक़ गांव में कोई लड़कियों के साथ नहीं है, “जब कोई उनके साथ नहीं है तो ये तो गांव की बदनामी ही हुई.”

ठेठ हरियाणवी में एक बुज़ुर्ग कहते हैं, “लड़कियां ऐसे पीटती रहीं तो सारे लड़के ख़त्म हो जाएंगे.”

हंसते हुए एक जवान लड़का बोल पड़ता है, “लड़के तो छेड़ते हैं. इसमें कोई दो-राय नहीं पर इस मामले में लड़कियां ही ग़लत थीं.” बाकी लड़के हामी में सर हिला देते हैं.

'बेल्ट घुमाई, अच्छा किया'

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Image caption गांव की महिलाएं लड़कों को जवाब देनेवाली लड़कियों को बहादुर समझती हैं.

गांव की महिलाओं से पूछें तो नज़रिया एकदम उलट है. चर्चा छिड़ती है तो हंसती वो भी हैं. एक सुर में कहती हैं, “लड़कियों ने कोड़े की तरह बेल्ट घुमा-घुमा के मारी, बड़ा अच्छा किया.”

बच्चे को गोद में लिए एक अधेड़ महिला कहती हैं, “इन बहनों की बात अगर सही हो जाए तो और लड़कियों के लिए भी अच्छा होगा, वर्ना जब वो गांव से बाहर जाएंगी और कुछ ऐसा होगा तो उन पर कौन यक़ीन करेगा.”

एक महिला तो यहां तक कहती हैं, “हम तो चाहते हैं कि लड़कियों के ही हक़ में फ़ैसला आए, जब हम बूढ़े हो जाते हैं तो वही परिवार का ख़्याल रखती हैं, लड़कों का क्या भरोसा.”

हालांकि सभी महिलाएं ये भी मानती हैं कि थोड़ी छेड़छाड़ होना तो हरियाणा में आम है, ऐसे में बात बढ़ाने में लड़कियों का ही क़ुसूर है.

'हम भी पीटने को तैयार हैं'

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Image caption पायल, पूजा और कीर्ती गवर्मेंट कॉलेज फॉर वीमेन में पढ़ाई कर रही हैं.

हरियाणा में औरतों और लड़कियों का दुनिया, और उसे समझने का नज़रिया जितना अलग दिखता है, उतना ही खुद को ‘बेचारी’ या लड़कों से कमतर समझने की उनकी सोच पुरुषों से मेल खाती है.

आरती और पूजा जिन दो कॉलेजों में पढ़ीं, वहां की लड़कियां उन्हें लड़कों को जवाब देने के लिए जांबाज़ तो मानती हैं पर बात बढ़ाने का दोषी भी.

किरावड़ गांव की पूजा देवी बीए की पढ़ाई कर रही हैं. उनके मुताबिक़, रोडवेज़ की बस में सफ़र करने का मतलब ही है छेड़ा जाना.

वो कहती हैं, “अगर छेड़छाड़ हद से गुज़र जाए तो हम भी मार दें, बाकी पुलिस केस के लिए तो परिवार का साथ चाहिए, अगर हमें भी अपने परिवार का साथ मिले जैसे इन बहनों को मिला तो हम आगे बढ़ें.”

उनके साथ कॉलेज के पार्क में बैठी पायल कहती हैं, “दिक्कत ये है कि अब लड़कियां बोलने लगीं हैं, तो समझा जाता है कि वो ही ग़लत हैं, और लड़कियों को चुप रहना चाहिए.”

'चुप रहेंगे तो वो फिर बोलेंगे'

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Image caption गांवों से कॉलेज जानेवाली ये सभी लड़कियां बस में छेड़छाड़ की शिकायत करती हैं.

लड़कियों की बातों में लगातार एक द्वंद दिखता है, उनके मन की ख़्वाहिशों और समाज की सोच के बीच.

कन्या महाविद्यालय में बीए कर रही प्रीती कहती हैं, “जब वीडियो देखा तो बड़ी हिम्मत मिली थी, पर फिर सुनने में आया कि लड़कों की ग़लती नहीं थी, इससे थोड़ी बेचैनी हुई.”

जब सब चुप हो गईं तो आख़िर में दबी ज़ुबान में मनीशा बोलीं, “एक दिन चुप रहेंगे तो अगले दिन वो फिर बोलेंगे, पर एक दिन वो पिट जाएंगे तो फिर आगे नहीं बोलेंगे.”

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