येचुरी आज बनेंगे सीपीएम महासचिव?

सीताराम येचुरी

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) का राष्ट्रीय अधिवेशन मंगलवार से शुरू हो रहा है.

इस अधिवेशन में पार्टी के नए महासचिव का चुनाव भी होना है. पार्टी के वरिष्ठ नेता सीताराम येचुरी को नया महासचिव बनाना लगभग तय माना जा रहा है.

पिछले एक दशक में पार्टी के जनाधार में काफ़ी गिरावट आई है और संसद में उसके सदस्यों की संख्या चौदहवीं लोकसभा के मुक़ाबले (44) गिर कर 16वीं लोकसभा में नौ पर आ गई है.

जबकि पश्चिम बंगाल में पार्टी की पुराना किला ढह चुका है. इन परिस्थितियों में नए महासचिव के सामने काफ़ी चुनौतियां होगीं.

बीबीसी से ख़ास बातचीत में सीताराम येचुरी ने पार्टी की आगे की रणनीतियों पर बात की.

पढ़ें, क्या कहते हैं सीतारम येचुरी

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अधिवेशन में केंद्रीय एजेंडा यह रहेगा कि आने वाले तीन सालों में पार्टी अपने आप को मज़बूत बनाए ताकि आज की राजनीतिक परिस्थिति का वे जनता के हक़ में सामना करे.

एक तरफ आर्थिक नीतियों की वजह से आम लोगों पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है दूसरी तरफ संप्रदायिक तनाव बहुत तेज़ी से बढ़ रहे हैं जिसकी वजह से धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए ख़तरनाक़ परिस्थिति पैदा हो रही है.

इन दोनों समस्याओं का सामना करना हमारा मुख्य उद्देश्य है.

चुनौतियां

अधिवेशन में आत्ममंथन भी किया जाएगा. आज हमारे सामने बहुत बड़ी चुनौती है. ऐतिहासिक तौर पर देखें तो अभी हमारा सबसे कम प्रतिनिधित्व है संसद और राज्यों के विधानसभाओं में.

ये गिरावट पार्टी के अंदर किस तरह से आई और इसे कैसे सुधारना है यही मुख्य सवाल होगा.

आज की चुनौतियों का सामना करने के लिए यह सुधार ज़रूरी है.

भारत की युवा आबादी जिसकी आज सबसे बड़ी तादाद है, उसे वामपंथी विचार की ओर कैसे मोड़ा जाए इस पर विचार होगा.

हम जनता परिवार के अंदर शुरू हुई नई मुहिम का स्वागत करते हैं. ऐतिहासिक तौर पर देखे तो भारत में वामपंथ की दो विचारधारा थी.

समाजवादी वामपंथी

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एक थी कम्युनिस्ट वामपंथी और दूसरी थी समाजवादी वामपंथी. दोनों के अंदर बिखराव हुआ, लेकिन समाजवादी वामपंथियों के अंदर बिखराव ज़्यादा हुआ.

आज जब उनमें एकजुटता आ रही है तो ये खुशी की बात है, लेकिन देखने वाली बात होगी कि किन उसूलों पर वे साथ आ रहे हैं.

उसूलों और कार्यक्रमों के अभाव में इनमें फिर से बिखराव आ जाता है. इस तरह की एकता जज़्बाती तौर पर नहीं आ सकती.

जहां तक नई जिम्मेदारी की बात है तो पार्टी जो भी जिम्मेदारी देगी वे निभाएंगे.

(बीबीसी संवाददाता पंकज प्रियदर्शी से बातचीत पर आधारित)

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