'हमें नहीं पता कैसे बनते हैं मुसलमान'

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रामपुर में तोपखाने इलाके के 80 वाल्मीकि परिवार 14 अप्रैल को इस्लाम धर्म स्वीकार करने के इरादे को किसी मौलवी के ना होने के कारण पूरा नहीं कर पाए.

उत्तर प्रदेश सरकार के सबसे ताकतवर मंत्री माने जाने वाले मोहम्मद आज़म खान के चुनावी क्षेत्र में प्रशासन सड़क चौड़ी करना चाहता है.

लेकिन रास्ते में इन वाल्मीकि परिवारों के घर आ रहे हैं जिन्हें अतिक्रमण घोषित कर गिराने की योजना बनाई.

लेकिन इन घरों को गिराने की प्रक्रिया शुरू होने से पहले, छह अप्रैल से वाल्मीकियों ने आंदोलन शुरू कर दिया है.

'शायद दिल पसीज जाए'

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अपने रिहायशी मकानों को "माननीय मंत्री जी के आक्रोश" से बचाने के लिए वाल्मीकियों ने 14 अप्रैल को सामूहिक धर्म परिवर्तन की घोषणा की थी.

उन्हें उम्मीद थी कि उनके मुसलमान बनने के बाद शायद आज़म खान "का दिल पसीज जाए".

अनशन कर रहे वाल्मीकि परिवार, 14 अप्रैल को मुसलमान बनने के लिए तैयार थे लेकिन उन्हें कोई मौलवी नहीं मिला.

एक आंदोलनकारी, कुमार एकलव्य ने बताया, "प्रशासन ने तोपखाने इलाके को छावनी बना रखा है इसलिए यहां कोई मौलवी तो आ नहीं पाया, बस हमने मुसलमानी टोपी पहन ली थी. हमें यह भी नहीं मालूम कि इस्लाम धर्म अपनाने के लिए क्या करना पड़ता है."

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तोपखाने के एक और निवासी, लकी ने कहा, "हम लोगों ने टोपी लगा कर, वो लोग जैसे दुआ पढ़ते हैं वैसे ही कर लिया."

यह पूछने पर क्या उन लोगों ने अपने नाम भी बदल लिए हैं, लकी ने कहा, "नहीं." .

वाल्मीकियों का कहना है कि उन्होंने कोई अतिक्रमण नहीं किया है और खुद नगर पालिका ने उनको वो ज़मीन दी है. साथ ही वे गृह और पानी का टैक्स भी देते हैं.

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