बाल यौन शोषण: ख़तरा अपनों से है

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पीडोफ़ीलिया एक ऐसी स्थिति है जिसे समाज घृणित मानता है लेकिन साथ ही साथ उससे जुड़े मामलों से आकर्षित भी होता है. सामान्यतः पीडोफ़ाइल ऐसे व्यक्ति को कहते हैं जिसे बच्चों के संपर्क से यौन आनंद मिलता है.

पीडोफ़ीलिया की स्थिति उत्पन्न होने के लिए एक वयस्क, एक बच्चा और असहमति से बनाए गए यौन संबंध का होना ज़रूरी होता है.

लेकिन पीडोफ़ीलिया होने की वजह क्या होती हैं और इससे जुड़े भ्रम, तथ्य क्या हैं?

पढ़िए पूरी रिपोर्ट

भारत में 'बच्चा' 14 साल (अनिवार्य शिक्षा समाप्ति की उम्र) से लेकर 21 साल (लड़कों की शादी की उम्र) तक हो सकता है.

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लड़कों और लड़कियों की शादी की नहीं यौन संबंध बनाने की उम्र भी अलग-अलग है. लड़कियों के लिए सहमति से यौन संबंध बनाने की आयु 16 साल (भारतीय दंड संहिता धारा 375) है तो लड़कों के लिए आयु की कोई सीमा नहीं है.

इसका अर्थ यह हुआ कि किसी भी उम्र का लड़का यौन संबंधों की सहमति दे सकता है (और यौन शोषण का शिकार भी हो सकता है), जबकि लड़कियां किशोरवय के बाद क़ानूनन इसके दायरे में आते हैं.

अब इससे भी ज़्यादा परेशान करने वाली हक़ीक़त की ओर नज़र डालिए. अब पीडोफ़ाइल्स को बच्चों पर हमला करने या उनसे संपर्क करने की ज़रूरत नहीं पड़ती, क्योंकि वे इंटरनेट या बच्चों को यौन शोषण की तस्वीरें देखकर यौन आनंद पा सकते हैं.

महिला पीडोफ़ाइल

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हालांकि सामान्यत: पीडोफ़ाइल को नफ़रत से देखा जाता है लेकिन बच्चों का यौन शोषण करने वाली महिलाओं के मामले में यह भावना बढ़ जाती है क्योंकि माना जाता है कि यह महिलाओं के मूल स्वभाव के ही विरुद्ध है.

पहले बच्चों का शोषण करने वाली महिलाएं पुरुष यौन शोषकों के साथ शामिल हुआ करती थीं लेकिन अब यह स्थिति बदल गई है.

अब माना जाता है कि जिन महिलाओं का बचपन में शारीरिक और यौन शोषण हुआ हो वह भी शोषक बन सकती हैं.

आश्चर्य की बात नहीं कि महिलाओं के बाल यौन शोषण के मामलों की रिपोर्ट कम होती है. यह इसलिए होता है क्योंकि अव्वल तो उनके शिकारों को मज़ाक उड़ाए या इसे 'मर्द बनने की रस्म' कहकर ख़ारिज किया जा सकता है.

किसी महिला द्वारा किया गया यौन शोषण बच्चे पर ज़्यादा बुरा प्रभाव डाल सकता है.

कैसे-कैसे पीडोफ़ाइल

बच्चों का यौन शोषण करने वाले में मुख्यतः बच्चों के प्रति यौन आकर्षण होता है, उसकी यौनेच्छा किशोरवय में जागती है और सही यौन विकास न होने से अटक जाती है.

उसकी समाज में घुलने-मिलने की क्षमता कमज़ोर होती है. वह अपनी उम्र के अनुरूप यौन संबंध नहीं बना पाता और बच्चों के साथ रहना पसंद करता है.

वह यौन हमला करने की योजना बहुत सोच-समझकर बनाता है, सामान्यतः लड़कों को शिकार बनाता है और हमला करने के लिए शराब पर निर्भर नहीं रहता.

लेकिन बदतर पीडोफ़ाइल का यौन विकास सामान्य होता है, उसका यौन आकर्षण अपनी उम्र के मुताबिक ही होता है और सामान्यतः वह शादीशुदा होता है.

उसकी पीडोफ़ीलिक प्रवृत्ति वयस्क उम्र में तनाव के चलते विकसित होती है. वह सामान्यतः आवेग में आकर हमला करता है, लड़कियों को शिकार बनाता है और शराब पीने से उसकी प्रवृति में तेज़ी पैदा हो जाती है.

ऐसा अपराधी अक्सर हिंसक और परपीड़क होता है. उसके अपराध ताकत के अहसास और पीड़ित पर नियंत्रण की भावना लिए होते हैं और इसीलिए वह बच्चों को शिकार बनाता है.

बुद्धिमत्ता का स्तर

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अब तक पीडोफ़ीलिया की कोई एक वजह पता नहीं चली है और पीडोफ़ीलिक प्रवृत्ति विकसित होने के लिए कई कारण एक साथ काम करते हैं.

सामान्यतः यह माना जाता था कि पीडोफ़ाइल की बुद्धिमत्ता का स्तर कम होता है लेकिन अब पता चला है कि अलग-अलग तरह के पीडोफ़ाइल्स में बुद्धिमत्ता का स्तर अलग होता है. रिश्तेदारी में बच्चों का यौन शोषण करने वालों की बुद्धिमत्ता का स्तर दूसरों से ज़्यादा होता है.

इसके अलावा ऐसे शादीशुदा आदमी जिनके बचपन में पारिवारिक माहौल अच्छा नहीं था. ये बात वैसे मामलों के आधार पर कही जा सकती है जिसमें लोगों को सज़ा हुई है.

यह शायद इसलिए भी क्योंकि संभ्रात वर्ग में पाए जाने ऐसे प्रवृति के लोग अपने शिकारों को 'ख़ामोश' कर देते हैं और उनका अपराध सामने नहीं आ पाता है.

दिमाग़ी आघात

दिमाग़ पर हुए तंत्रिका संबंधी आघात (जिनमें न्यूरोटॉक्सिन, जेनेटिक गड़बड़ी और सिर पर लगी चोट शामिल हैं) को पीडोफ़ीलिया की संभावित वजहें बताया जाता है. लेकिन इस वक्त तो यकीन के साथ यही कहा जा सकता है कि बच्चों के साथ किसी वयस्क का यौन संपर्क दिमाग़ी गड़बड़ी का ही परिणाम हो सकता है.

शोषण का चक्र पीडोफ़ीलिया का सबसे स्वीकृत नमूना है. इसके अनुसार जिनका बचपन में यौन शोषण हुआ हो उसके खुद हमलावर बनने की आशंका बहुत ज़्यादा होती है, क्योंकिः

(1) वह हमलावर में ख़ुद को देख सकता है. (2) उनमें अपने शोषण के ख़िलाफ़ लगातार एक गुस्सा बना रहता है और इसलिए वह दूसरे बच्चों का शोषण करते हैं. (3) एक पीड़ित से एक शोषक बनना स्वाभाविक प्रगति है और (4) बचपन में हुए यौन शोषण से उनको दिमागी नुक़सान होता है जिससे उनमें दूसरे बच्चों के प्रति यौन आकर्षण पैदा होता है.

अपनों से ख़तरा

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वजह चाहे जो भी पीडोफ़ीलिया पर कोई भी लेख इस पर ज़ोर दिए बिना नहीं लिखा जा सकता कि इस मामले में 'अजनबी का डर' अतिशयोक्ति ही है.

यह माना जा चुका है कि सामान्यतः और विशेषकर पीडोफ़ीलिया के मामले में हमलावर परिवार में से या बच्चे के नज़दीकी लोगों में से एक होता है.

चिंता की बात यह है कि बच्चों का यौन शोषण करने वालों में आधे अभिभावक होते हैं या बीस फ़ीसदी अन्य रिश्तेदार.

यह पहेली अब भी अनसुलझी ही है लेकिन ख़तरा बहुत पास है.

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