संसद में गूंजी गजेंद्र की आत्महत्या

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आम आदमी पार्टी की रैली में एक किसान की आत्महत्या का मुद्दा संसद के दोनों सदनों में ज़ोर शोर से उठा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "किसानों की समस्या पुरानी और व्यापक है और हमें यह सोचना होगा कि वह कौन सी कमियां रहीं जिसकी वजह से इसका पूरा समाधान नहीं हो पाया."

उनका कहना था कि संसद में चर्चा से सामूहिक संकल्प बना है कि किसानों को असहाय न छोड़ा जाए और उनकी समस्या के हल का रास्ता खोजा जाए.

लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री से इस मामले की न्यायिक जांच कराने को कहा.

उन्होंने सरकार से यह भी पूछा कि किसानों की मौत हो रही हैं तो उनकी आर्थिक मदद के लिए क्या प्रावधान किए गए हैं.

भूमि अधिग्रहण विधेयक के ख़िलाफ़ आम आदमी पार्टी की रैली के दौरान राजस्थान से आए एक किसान गजेंद्र सिंह ने पेड़ से लटक कर आत्महत्या कर ली.

'मन की बात काफ़ी नहीं'

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लोकसभा में गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि किसान गजेंद्र सिंह की आत्महत्या की समयबद्ध जांच का आदेश क्राइम ब्रांच को दे दिया गया है.

उन्होंने कहा कि वह विपक्ष को किसान विरोधी नहीं कह रहे हैं लेकिन मिलजुल कर इस समस्या का समाधान निकाला जाना चाहिए.

लोकसभा में 'आप' के सांसद भागवत मान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाने पर लेते हुए कहा कि सिर्फ़ 'मन की बात' करना काफ़ी नहीं है और इससे किसानों की समस्या का हल नहीं हो सकता है.

इस पर लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने एतराज जताया और कहा कि इसे आधिकारिक रिकॉर्ड में शामिल नहीं किया जा सकता है. हालांकि बाद में उन्होंने कहा कि वह इस पर पुनर्विचार करेंगी.

'किसानों को फ़ायदा नहीं'

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इसी चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव ने कहा कि किसानों को अगर स्वतंत्र कर दिया जाए तो दुनिया में किसी देश से कर्ज़ लेने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी.

उन्होंने कहा कि विदेशी दौरे के बजाए किसानों पर ख़र्च करना चाहिए और खेती को मुनाफेदायक पेशा बनाने की ज़रूरत है.

दूसरी तरफ़ राज्यसभा में बहुजन समाज पार्टी नेता मायावती ने भी कहा कि किसानों को वक़्त पर मुआवज़ा भी नहीं मिलता है.

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जदयू नेता शरद यादव ने कहा कि जैसे ग़रीबों के बारे में आंकड़े नहीं मौजूद वैसे ही बर्बाद फ़सलों का भी कोई प्रमाणिक आंकड़ें नहीं हैं.

उनका कहना था कि भ्रष्टाचार की वजह से किसानों को उनकी योजनाओं का लाभ नहीं मिलता है.

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