शादी में बलात्कार हमारे यहां नहीं: सरकार

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भारत सरकार ने कहा है कि भारतीय मुल्यों के मुताबिक़ शादी एक पवित्र बंधन है और इसमें बलात्कार की अवधारणा को लागू नहीं किया जा सकता.

गृह राज्य मंत्री हरिभाई परथीभाई चौधरी ने बुधवार को कहा "विदेश की तरह भारत के परिप्रेक्ष्य में शादी में रेप की अवधारणा को लागू नहीं जा सकता. ऐसा नहीं करने के अनेक कारण हो सकते हैं जैसे कि शिक्षा का स्तर, अशिक्षा, ग़रीबी, सामाजिक रीति-रिवाज, लोगों की शादी को पवित्र मानने वाली सोच."

चौधरी राज्य सभा में डीएमके के मंत्री कनिमोड़ी के उठाए सवालों का जवाब दे रहे थे.

कनिमोड़ी ने पूछा था कि क्या सरकार भारतीय दंड संहिता में बदलाव लाने के लिए बिल पेश करेगी ताकि शादी में होने वाले जबरन सेक्स को रेप की परिभाषा में शामिल किया जा सके.

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उन्होंने यह भी पूछा था कि क्या सरकार को संयुक्त राष्ट्र द्वारा लाई गई औरतों के ख़िलाफ़ अत्याचार ख़त्म करने के लिए बनी कमिटी ने शादी में रेप को अपराध मानने की सिफारिश नहीं की थी?

कनिमोड़ी ने कहा था कि संयुक्त राष्ट्र पॉपुल्शन फण्ड के अनुसार भात में 75 प्रतिशत महिलाएं शादी में रेप का शिकार होती हैं.

चौधरी ने माना कि विदेश मंत्रालय और महिला एवं विकास मंत्रालय ने सीडॉ की सिफ़ारिश मान कर शादी में रेप को अपराध बनाने करने की सिफ़ारिश की थी.

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उन्होंने कहा, "भारतीय लॉ कमीशन ने रेप क़ानून की समीक्षा पर अपनी 172वीं रिपोर्ट बनाते वक़्त भारतीय पीनल कोड की धारा 375 को बदल कर शादी में होने वाले रेप को आपराधिक बताने की सिफ़ारिश नहीं की थी."

मंत्री ने कहा, "इस कारण अभी आईपीसी में अभी किसी तरह का बदलाव करने की गुंजाइश नहीं है."

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