ये किसकी ख्वाहिशों की दीवारें हैं?

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दिल्ली का एक इलाक़ा ऐसा है, जहां बच्चे अपनी पहचान बताने से घबराते हैं.

ये है दिल्ली का रेड लाइट इलाक़ा. यहां फ़िलहाल कोई स्कूल नहीं है. कभी एक सरकारी स्कूल था, जो अब बंद हो गया है.

इस इलाक़े के बच्चे पढ़ने के लिए या तो आस-पास के इलाक़ों में जाते हैं या फिर यहां जो संस्थाएं सक्रिय हैं, वहां पढ़ते हैं.

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इन्हीं संस्थाओं में से एक है कट कथा. कट कथा यहां की एक इमारत की छत पर चलती है.

पिछले सात सालों से कट कथा सेक्स वर्कर के बच्चों को ट्यूशन देती है.

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यहाँ बच्चे दोपहर बारह बजे आते हैं और रात को वापस घर चले जाते हैं.

इस बीच ये बच्चे यहीं रहते हैं और दोपहर का खाना भी उन्हें यहीं मिलता है.

अनगिनत सपने

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जिस मकान की छत पर संस्था का दफ़्तर है उसकी दीवारों पर इन बच्चों ने अपने सपनों की कहानी लिख डाली है.

किसी का सपना है कि वो अपनी मम्मी को यहाँ से दूर ले जाए तो कोई बच्ची लिखती है कि एक्ट्रेस बनना चाहती है.

कोई बच्चा चाहता है कि वो रेड लाइट एरिया के जीवन से दूर निकल जाए, किसी की ख्वाहिश है कि ये जिंदगी बदल जाए.

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सभी बच्चों में ऐसी ही कई ख्वाहिशें हैं जो इस तरह से बयां होती हैं.

ख़्वाहिशों की दीवारें

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दिल्ली के रेड लाइट के इस इलाक़े के इन्हीं बच्चों में से एक अजय कहते हैं कि वो बड़े होकर पुलिस बनना चाहते हैं.

जिस दीवार पर इन बच्चों ने अपने सपने लिखे हैं उसको वे अब सपनों की ख्वाहिशों की दीवार कहते हैं.

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इन बच्चों को पढ़ाने वाली टीचर गीतांजलि का कहना है कि शायद इनके सपनों को पूरा करने में इससे कोई मदद मिल सके.

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