'हम नींद में थे, तभी गाड़ी चढ़ गई'

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अभिनेता सलमान ख़ान ने 28 सितंबर 2002 की रात नशे की हालत में अपनी गाड़ी मुंबई के बांद्रा इलाक़े के फुटपाथ पर सो रहे लोगों पर चढ़ा दी थी, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और चार अन्य घायल हो गए थे.

इन घायलों में एक हैं कलीम पठान. उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर के रहने वाले कलीम मुंबई की ए-वन बेकरी में काम करते थे.

सलमान खान को सज़ा मिलने से कलीम पठान को राहत तो मिली लेकिन वो इससे पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं.

बीबीसी से घटना की रात का अनुभव साझा करते हुए कलीम पठान ने बताया अदालत से क्या थीं उनकी उम्मीदें.

कलीम पठान ने जो कहा....

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Image caption कलीम पठान अब कोई काम नहीं कर पाते.

28 सितंबर, 2002 को दिन भर काम करने के बाद हम रात को क़रीब 8-9 बज़े खाना खाकर सो गए थे.

हम सभी लोग सो चुके थे. अचानक गाड़ी आ गई और हमारे ऊपर चढ़ गई.

उसके बाद काफ़ी तेज़ आवाज़ हुई. हम लोग गाड़ी में फंस गए थे. हम उससे निकल कर भागने की कोशिश करने लगे.

आवाज़ सुनकर बेकरी के लोगों के अलावा बहुत से लोग आ गए, फिर उन सब ने हम सबको बाहर निकाला.

घटना में मुझे पैर और हाथ में गंभीर चोटें आई थीं. चोट के कारण मुझे कमर, सीने और पैर में दर्द रहता है. मुझसे अब पहले जैसा काम नहीं होता.

अदालत ने जो फ़ैसला दिया है उससे इंसाफ़ तो हुआ है लेकिन इससे हमें क्या फ़ायदा मिला!

हादसे के बाद हमें डेढ़ लाख रुपए मिले थे. लेकिन पिछले 13 सालों से हम बेकार घर पर बैठे हैं. हम कोई काम नहीं कर पाते.

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Image caption अदालत जाते हुए सलमान ख़ान

हमारी एक बीवी है और एक बेटी है. हमारी बुज़ुर्ग पिता भी अभी जीवित हैं. हमारी दो बहनों और दोनों भाइयों की शादी करनी है.

अब हमारा परिवार किसी तरह अपने छोटे भाई की कमाई पर गुज़ारा करता है.

हमें उम्मीद थी कि अदालत से हमें मुआवज़ा मिलेगा, जिससे किसी तरह हमारा गुज़र-बसर हो जाता.

लेकिन ऐसा नहीं हुआ बाक़ी हमारी ज़िंदगी तो बेकार हो गई है.

(अतुल चंद्रा और वात्सल्य राय से बातचीत पर आधारित)

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