बॉलीवुड का 'इमोशनल अत्याचार'

नाटक का पहला अंश- 16 मई 2013.

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बॉलीवुड का एक वरिष्ठ अभिनेता जेल जाता हुआ. पूरा बॉलीवुड परिवार एकजुट होकर उसके समर्थन में बयान देता है.

दूसरा अंश- 6 मई 2015.

बॉलीवुड के एक दूसरे अभिनेता को जेल की सज़ा सुनाई जाती है. एक बार फिर बॉलीवुड उद्योग एक साथ उसकी बेगुनाही और उसके अच्छे इंसान होने का राग अलापता है.

दोनों ही आपराधिक मामले हैं. केवल अभिनेता अलग हैं. पहले अंश में संजय दत्त और दूसरे में उनके क़रीबी दोस्त सलमान ख़ान हैं.

संजय दत्त को मुंबई में 1993 में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में आर्म्स एक्ट के तहत दोषी पाया जाता है और जेल भेजा गया.

दूसरे अंश में सलमान ख़ान को हिट एंड रन मामले में जेल की सज़ा होती है.

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दोनों मामलों में लोगों की जानें जाती हैं और मरने वालों के परिवार उजड़ जाते हैं, लेकिन मानवता और नैतिकता के मुद्दों पर फ़िल्में बनाने वाली फ़िल्म इंडस्ट्री इन परिवार वालों के बारे में कुछ नहीं सोचती.

और तो और, गायक अभिजीत ने ट्विटर पर सलमान को सज़ा सुनाए जाने के बाद आपत्तिजनक टिप्पणी की.

ये बॉलीवुड की दुनिया अजीब है. एक तरफ यहाँ ज़बरदस्त कॉम्पटीशन है, तो दूसरी तरफ बाहर की दुनिया के ख़िलाफ़ एकजुट होने का एक ज़बरदस्त माहौल.

इस उद्योग का हर सदस्य मुसीबत की घड़ी में एक दूसरे को बचाने की हर मुमकिन कोशिश करता है.

बाहर से जितनी चमकदार है ये दुनिया, अंदर से उतनी ही खोखली. यहाँ एक दूसरे की बुराई और गॉसिप से कोई नहीं बचता.

मैंने इस दुनिया को बहुत क़रीब से देखा है. इनके साथ पार्टियां की हैं. डांस, गाना बजाना सब किया है. ये दुनिया किसी की नहीं है.

अभिनेताओं के अहम इतने नाज़ुक होते हैं कि छोटी सी मज़ाक वाली बातों पर झगड़े हो जाते हैं और महीनों बातचीत बंद रहती है.

एकता

यहाँ पैसा बोलता है. ये सपने बनने और टूटने की एक फैक्टरी है. शोहरत और क़ामयाबी जितनी अधिक, असुरक्षा और जलन का अहसास भी उतना ही ज़्यादा.

आखिर क्या वजह है बॉलीवुड में बाहर वालों के ख़िलाफ़ एकता की?

तीनों खानों के अलावा संजय दत्त, ऋतिक रोशन और इक्का-दुक्का दूसरे सितारों की क़ामयाबी पर ये उद्योग टिका है.

एक बार मुझे एक डायरेक्टर ने कहा था कि अगर किसी की फ़िल्म को सलमान ख़ान ने साइन कर दिया तो फ़िल्म फ्लॉप होने पर भी निर्माता-निर्देशक को आर्थिक नुक़सान नहीं होगा.

इन अदाकारों के नामों से इंडस्ट्री के कई एक्टरों, डायरेक्टरों और निर्माताओं के अलावा कई फ़िल्मी परिवारों का भविष्य जुड़ा रहता है.

इसीलिए दो साल पहले जब संजय दत्त को जेल जाना पड़ा तो सारी इंडस्ट्री उनके समर्थन में एक साथ बोली. इसमें खुद सलमान ख़ान शामिल थे.

लोकप्रियता

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दूसरा कारण शायद ये है कि संजय और सलमान इंडस्ट्री में काफी लोकप्रिय हैं.

बहार की दुनिया के लिए वो 'बैड ब्वॉयज़' हैं, लेकिन बॉलीवुड में ये सभी जानते हैं कि वो दिलदार हैं, होश से ज़्यादा जोश में काम करते हैं.

कोई दुखड़ा लेकर जाए उनके पास तो वो फ़ौरन मदद करते हैं.

तीसरा कारण ये हो सकता है कि बॉलीवुड खेमों में बंटा है, लेकिन बुरे समय में एक दूसरे का हमेशा साथ देता है.

कैंप फॉलोविंग बॉलीवुड का एक अहम पहलू है. एक बार एक फ़िल्म रिलीज़ की पार्टी में संजय दत्त से मैंने एक छोटा सा इंटरव्यू करने की अनथक कोशिश की, लेकिन क़ामयाब न हुआ.

ग़रीबों का ख़्याल

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मेरी नज़र अचानक सुनील शेट्टी पर पड़ी जो मेरे दोस्त थे. मुझे मालूम था दोनों में गहरी दोस्ती है और दोनों एक ही कैंप के हैं.

मैंने सुनील से कहा, "आप संजय दत्त से कहो कि वो मुझ से बात करें." और एक मिनट में मेरा काम हो गया.

लेकिन बॉलीवुड में नाकामी, ग़रीबी और बेरोज़गारी तीन गंदे शब्द हैं.

किसी न किसी समय पर अक्सर अभिनेता इन तीनों दौर से गुज़रे होते हैं और वो इन तीन शब्दों से भयभीत हैं.

शायद इसीलिए उन्होंने सलमान और संजय दत्त के केस में पीड़ितों के ग़रीब परिवार वालों का ख़्याल नहीं आया.

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