वंजारा का अमित शाह पर फिर निशाना

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गुजरात के पूर्व आईपीएस अधिकारी डीजी वंजारा ने गुजरात सरकार और भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह के ख़िलाफ़ ताज़ा हमला बोला है.

वंजारा ने इस बार पुलिस अधिकारियों के प्रमोशन को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है.

2013 में इस्तीफ़ा देने वाले पूर्व डीआईजी वंजारा फ़र्ज़ी मुठभेड़ के तीन मामलों में अभियुक्त हैं और अभी ज़मानत पर चल रहे हैं.

वंजारा ने गृह मंत्रालय के अतिरिक्त मुख्य सचिव जीआर एलोरिया को चिट्ठी लिखकर पुलिस अधिकारियों की हालिया पदोन्नति में भेदभाव करने और आईपीएस अधिकारियों की दोबारा बहाली करने के आरोप लगाए हैं.

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Image caption वंजारा पर तीन फ़र्ज़ी मुठभेड़ के मामले चल रहे हैं.

बीबीसी को मिली इस चिट्ठी की कॉपी के अनुसार उन्होंने ये भी लिखा है कि अपने और कुछ अन्य अधिकारियों के साथ भेदभाव हुआ है और इन सबकी पदोन्नति होनी चाहिए थी.

इन पुलिस अधिकारियों में पीपी पांडे, राजकुमार पांडियन, अभय चुडासमा, विपुल अग्रवाल, जीएल सिंघल, एनके अमिन और बीआर चौबे के नाम शामिल हैं.

आरोप

वंजारा ने आरोप लगाया है कि अतिरिक्त पुुलिस महानिदेशक पीपी पांडे की जगह आईपीएस गीता जौहरी की पदोन्नति ग़लत तरीके से की गई है.

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उनका कहना है कि इस पदोन्नति में सही प्रक्रिया नहीं अपनाई गई और ऐसा अमित शाह और पुलिस अधिकारी पीसी पांडे को बचाने के लिए किया गया है.

सोहराबुद्दीन फ़र्ज़ी मुठभेड़ मामले में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और पुलिस अधिकारी पीसी पांडे को सीबीआई की अदालत रिहा कर चुकी है.

वंजारा ने कहा है कि जिन लोगों ने राजनेताओं और पुलिस पर आरोप लगाए थे और बरी हो चुके हैं, ''उन्हें आज़ादी से घूमने नहीं दिया जाएगा.''

पर तीन फ़र्जी मुठभेड़ के मामले चल रहे है और फिलहाल में ज़मानत पर हैं.

वंजारा ने 2013 में दिए अपने त्यागपत्र में अमित शाह के ख़िलाफ़ गंभीर आरोप लगाए थे. उन्होंने लिखा था कि नरेंद्र मोदी पर अमित शाह का बुरा प्रभाव पड़ रहा है.

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