जयललिता की अर्ज़ी पर फ़ैसला आज

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तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के मामले में कर्नाटक हाई कोर्ट सोमवार को अपना फ़ैसला सुनाएगा.

फ़ैसला जो भी हो, तमिलनाडु की राजनीति पर इसका दूरगामी असर पड़ना तय है.

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किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए बड़े पैमाने पर पुलिस बंदोबस्त किया गया है. बेंगलुरु में अदालत के आस पास निषेधाज्ञा लगा दी गई है. कर्नाटक और तमिलनाडु की सीमा पर भी सुरक्षा कड़ी कर दी गई है.

सेशन कोर्ट के जज जॉन माइकल डी कुन्हा ने पिछले साल 27 सितंबर को जयललिता को आय से अधिक संपत्ति के मामले में दोषी पाया था.

उन्हें अनुचित तरीक़े से 53.64 करोड़ रुपए जमा करने का दोषी पाया गया था. इसके ख़िलाफ़ जयललिता की अर्ज़ी पर जज सीआर कुमारस्वामी ने 11 मई को अपना फ़ैसला सुरक्षित रखा था.

पनीरसेलवम पर सवाल

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दोषी ठहराए जाने के बाद जयललिता को मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा था.

उन्हें चार साल की सज़ा सुनाई गई और वो 20 दिन बेंगलुरु की सेंट्रल जेल में भी रहीं. कर्नाटक हाई कोर्ट ने उनकी ज़मानत याचिका को ख़ारिज कर दिया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट से उन्हें ये राहत मिल गई थी.

जयललिता की जगह मुख्यमंत्री बने ओ पनीरसेलवम के कामकाज पर सवालिया निशान लगते रहे हैं.

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक भगवान सिंह कहते हैं, "जयललिता के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद से राज्य का प्रशासन सुस्त हो गया है, फ़ैसले देर से लिए जा रहे हैं.”

पनीरसेलवम अब भी मुख्यमंत्री कार्यालय से काम नहीं करते हैं, बल्कि वो राज्य के वित्त मंत्रालय से ही सरकार चलाते हैं. जयललिता के मंत्रिमंडल में वो वित्त मंत्री ही थे.

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वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक भगवान सिंह कहते हैं, “अगर जयललिता को दोषी ठहराया जाता है तो उनके पास फिर सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का विकल्प होगा. लेकिन इससे राज्य में अनिश्चितिता का दौर जारी रहेगा."

सहयोगियों पर भी फ़ैसला

अन्नाद्रुमक अब तक जयललिता के करिश्मे के दम पर भी चुनाव जीतती रही है. उन्हीं के नाम पर सरकार चल रही है. वो 'अम्मा' के नाम से मशहूर हैं.

उन्हें दोषी क़रार दिए जाने के बाद पनीरसेलवम ने राज्य का बजट 'अम्मा के मार्गदर्शन' में ही पेश किया. यहां तक कि राज्य सरकार की तरफ़ से प्रधानमंत्री को पत्र भी 'अम्मा के मार्गदर्शन' में ही लिखे जाते हैं.

ऐसे में, पार्टी कार्यकर्ता उनके बरी होने के लिए अलग अलग जगह मंदिरों में प्रार्थना कर रहे हैं.

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बड़ी संख्या में जयललिता के समर्थक बेंगलुरु पंहुच सकते हैं, ऐसे में पुलिस विचार कर रही है कि उन्हें एक निश्चित जगह पर जमा होने दिया जाए. लेकिन अदालत के आस पास इसकी इजाज़त न दी जाए.

इससे पहले एक विशेष अदालत ने जयललिता को बतौर मुख्यमंत्री उनके पहले कार्यकाल में 1991-96 के दौरान अनुचित तरीके से संपत्ति जमा करने का दोषी पाया था और उन पर सौ करोड़ रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है.

सोमवार को जयललिता के अलावा वीके शशिकला, वीएन सुधाकरण और जे इल्यारसी के मामलों पर भी अदालती फ़ैसला करेगी. इन सभी को चार-चार साल की सज़ा दी गई है.

ट्रायल कोर्ट ने इन लोगों को 10-10 करोड़ रुपए का जुर्माना भरने का भी आदेश दिया. ऐसा नहीं करने पर उन्हें एक साल और जेल में रहना होगा.

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