जनता दल का विलय बिहार चुनाव बाद ही?

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समाजवादी पार्टीे के नेता रामगोपाल यादव के हवाले से मीडिया में ख़बरें आ रही हैं जिसमें उन्होंने कहा है कि 'बिहार चुनाव से पहले जनता परिवार के दलों का विलय मुमकिन नहीं है'.

हालांकि राष्ट्रीय जनता दल के प्रवक्ता मनोज झा ने कहा है कि जिन कठिनाईयों का ज़िक्र रामगोपाल यादव ने किया वो पहले से ही पार्टी के ध्यान में थीं.

चुनाव आयोग से मिलने के बाद ही

जनता दल यूनाइटेड ने कहा है कि वो कुछ भी चुनाव आयोग से मिलने के बाद ही कह पाएगी.

पूरे मामले पर राजद के मनोज झा ने ये भी कहा कि विलय पर कोई सैद्धांतिक विरोध नहीं है और मौजूदा राजनीतिक हालात में जनता परिवार के छह दल मिलकर बिहार से एक नई वैकल्पिक व्यवस्था शुरु करेंगे.

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उन्होंने कहा, ‘‘तकनीकी पेजीदगियों को दलों के स्तर और चुनाव आयोग के साथ मिलकर दूर कर लिया जायेगा.’’

‘जल्द ही लेकिन जल्दबाज़ी में नहीं’

क्या जिन तकनीकी परेशानियां की बात हो रही हैं उनको दूर करने के पहले ही विलय की घोषणा कर जनता परिवार ने भूल की है?

इस पर राष्ट्रीय जनता दल ने प्रवक्ता ने कहा, ‘‘एक बार जब साथ सफर करने का फैसला कर लिया जाता है तो कई चीजें माइलस्टोन के रुप में सामने आती हैं. ये परेशानियां ऐसे मील के पत्थरों पर रुकने जैसा है. इससे यात्रा खत्म नहीं होगी.’’

विलय में तकनीकी दिक्क़ते

वहीं जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद केसी त्यागी ने कहा, ‘‘मैं कल जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव के साथ चुनाव आयोग के पास जाऊंगा. इसके बाद ही पार्टी इस मुद्दे पर अपनी बात रखेगी.’’

पार्टी के प्रमुख नेता और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस हफ्ते अपनी दिल्ली यात्रा के दौरान मुलायम सिंह यादव और लालू प्रसाद यादव से मुलाक़ात की थी.

उन्होंने संवाददाताओं से कहा था कि सब कुछ जल्दी ही होगा, लेकिन जल्दबाजी में नहीं.

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गौरतलब है कि छह दलों ने पिछले महीने विलय की घोषणा करते हुए मुलायम सिंह यादव को राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना था.

साथ ही कार्यक्रम, चुनाव चिन्ह वग़ैरह तय करने को मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में सात सदस्यीय समिति भी बनी थी.

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