'अब्बू को बोला छोटे में शादी कराई तो जेल जाइएगा'

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Image caption मुर्सरत के घर में छोटे कपड़े पहनने की सख्त मनाही है.

बिहार के मुर्गियाचक गांव की मुर्सरत हर समय दुपट्टा ओढ़े रहती हैं. उनके घर में छोटे कपड़े पहनने की सख्त मनाही है.

12 साल की ये दुबली-पतली लड़की चेहरे से ही एनीमिया की शिकार लगती है. लेकिन मुर्सरत को इन दिनों फुटबॉल खेलने का शौक चढ़ा है. वो कमर में दुपट्टा बांधकर फुटबॉल के पीछे सरपट भागती हैं.

फुटबॉल खेलने के लिए तो निक्कर पहननी पड़ेगी, मेरे इस सवाल पर वो धीमे स्वर में शर्माते हुए बोली, "मैं घुटनों तक वाली निक्कर पहनूंगी और घर वालों को इस बात का पता नहीं चलने दूंगी."

शादी का दबाव

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Image caption नाज़ की बड़ी बहन की शादी तो आठवीं में पढ़ते पढ़ते ही हो गई थी.

मुर्सरत की सहेली नाज़ की आपी (बड़ी बहन) की शादी तो आठवीं में पढ़ते पढ़ते ही हो गई थी. छठी में पढ़ने वाली नाज़ 12 साल की हो चुकी हैं. उन पर भी शादी का दबाव महसूस होने लगा है.

लेकिन जब वो फुटबॉल खेलती हैं तो ये सारे दबाव दिलो दिमाग से उड़न छू हो जाते हैं. शरारती आंखों वाली ये बच्ची कहती है, " अब्बू अम्मी को मैंने बता दिया है, छोटे में शादी कीजिएगा तो जेल जाइएगा."

फ़ुटबॉल के ज़रिए बाल विवाह की समस्या से निपटने, लड़कियों की स्कूली शिक्षा को बढ़ावा देने और बच्चों को यौन शिक्षा देने की ये कोशिश पटना के आस पास के अधपा, सुइथा, सकरैचा, मुर्गियाचक सहित 10 गांवों में हो रही है.

पटना से सटे परसा की संस्था ग्रामीण महिला विकास मंच ने नवंबर 2013 से ये काम शुरू किया.

टीम भावना

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इस काम में उनकी मदद दिल्ली की संस्था सीआरईए कर रही है. संस्था ने फ़ुटबॉल सिखाने के लिए बच्चियों को फ़ुटबाल कोच की व्यवस्था की.

फिलहाल हर गांव में 11 से 16 साल की 25 स्कूली बच्चियों की टीम है. हर रविवार को ये लड़कियां गांव के ही किसी मैदान में जुटती है और फुटबाल खेलती है.

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संस्था की सदस्य प्रतिमा बताती है, "हमने जब बच्चियों को किसी खेल से जोड़ने के बारे में सोचा तो बहुत सारे खेल के सुझाव आए. लेकिन हमने फ़ुटबाल चुना क्योंकि इसमें टीम भावना है और यही टीम भावना हमें बहुत सारी सामाजिक बुराइयों से लड़ने में मददगार साबित हो रही है. "

इन बच्चियों की ट्रेनर स्नेहा बताती है, "ये लड़कियां ही जब फ़ुटबॉल खेलने के लिए जुटती है तो गांव के और अपने घर के बारे में जानकारी देती हैं मसलन किसकी बच्ची स्कूल नहीं जा रही, किसकी शादी हो रही है, वगैरह वगैरह. हम उनकी ख़बरों के आधार पर ही ज़रूरी हस्तक्षेप करते हैं."

इस नेटवर्क के ज़रिए ही इन गांवों में कई बच्चियों की शादी रूकी है या थोड़े दिनों के लिए टली है.

फ़ुटबॉल खेलने से रुकी शादी

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Image caption सरिता की शादी भी फ़ुटबाल खेलने की वजह से रूकी.

अधपा गांव की सरिता की शादी भी इसी फ़ुटबाल खेलने की वजह से रूकी. 5 बहनों के उसके परिवार में सभी बहनों का बाल विवाह हुआ है.

सरिता बताती है, "मुझसे बड़ी बहन, छोटी उम्र में जब मां बनी तो पूरे शरीर में जगह जगह खून जम गया. लेकिन फिर भी किसी को कोई चिंता नहीं. आस पड़ोस वाले शादी का ताना मारना नहीं भूलते लेकिन मैं भी अब उन्हें पलटकर जवाब देती हूं.”

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आंकड़े के मुताबिक़ बिहार में 60 फ़ीसदी बच्चियों की शादी 19 साल से कम उम्र में हो जाती है जबकि पूरे देश में ये आंकड़ा 41 फ़ीसदी का है.

सकरैचा गांव की रामरति कहती है, "जब लड़की को महीना आ गया तो समझो शादी लायक हो गई."

रामरति जो कह रही है शायद ये 250 लड़कियां फ़ुटबाल के जरिए उसे ही जीवन के मैदान से बाहर का रास्ता दिखाने की कोशिश कर रही है.

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