'अम्मा' को निर्दोष बताने के फ़ैसले पर उठे सवाल

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तमिलनाडु के विपक्षी दलों ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के उस फ़ैसले पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं जिसके तहत अन्नाद्रमुक प्रमुख जयललिता को आय से अधिक संपत्ति के मामले में निर्दोष करार दिया गया था.

इसी से जयललिता के दोबारा तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ़ हुआ है.

कम से कम तीन दलों ने जस्टिस सीआर कुमारस्वामी के 919 पेज के फ़ैसले में हिसाब की कथित गड़बड़ियों का ज़िक्र किया है.

डीएमके प्रमुख एम करुणानिधि, पीएमके के डॉक्टर पी रामदौस और कॉंग्रेस अध्यक्ष ई इलान्गोवान ने फ़ैसले पर टिप्पणियां की हैं.

'कर्नाटक चुनौती दे'

करुणानिधि ने कहा, "जज कुमारस्वामी ने कहा कि जयललिता और अन्य ने जो भी कर्ज़ लिए उन्हें उनकी आमदनी के रूप में देखना चाहिए. इन ऋणों की कुल जमा राशि 24,17,31,274 रुपए है. लेकिन फ़ैसले के मुताबिक इन ऋणों का हिसाब लगाने पर यह राशि 10,67,31,274 रुपए बनती है."

जस्टिस कुमारस्वामी ने कहा आय से अधिक संपत्ति सिर्फ़ 2.82 करोड़ ही बनती है. यह आय पूर्व मुख्यमंत्री की दिखाई गई आय का सिर्फ़ 8.12 फ़ीसदी है.

उच्चतम न्यायालय के एक फ़ैसले का हवाला देते हुए जस्टिस कुमारस्वामी ने अपने फ़ैसले में कहा कि 10 फ़ीसदी से कम के अंतर को आय से अधिक संपत्ति का मामला नहीं माना जा सकता.

करुणानिधि और अन्य ने जिस ग़लती का उल्लेख किया है अगर उस पर ग़ौर किया जाए तो आय से अधिक संपत्ति 13.5 करोड़ रुपए बैठती है और उच्चतम न्यायालय की छूट की सीमा (यानी 10 प्रतिशत) से कहीं ज़्यादा हो जाती है.

करुणानिधि ने कर्नाटक सरकार से भी मांग की है कि वह इस फ़ैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दे.

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