31 साल पहले जो भटककर पाकिस्तान चला गया...

पंजाब, पाकिस्तान में फंसा बालक इमेज कॉपीरइट Ravinder Singh Robin

बात साल 1984 की. कहानी भारत पाकिस्तान सीमा के एक छोटे से गाँव कोट रायजादा से शुरू हुई. एक सात का बच्चा नानक अपने पिता के साथ खेत जाते समय भटक गया. उन दिनों दोनों देशों की सीमा पर आज की तरह कंटीले तारों की बाड़ नहीं थी.

बच्चा ना कैसे पाकिस्तान जा पहुंचा. फिर शुरू हुआ बच्चे को वापस लाने के लिए कागज़ी युद्ध, दसियों साल लगे नानक की पहचान साबित करने में.

इस बीच नानक को इधर-उधर भटकते पाए जाने पर जेल भेज दिया गया.

माँ बाप को ज़रा उम्मीद बंधी ही थी बात फिर बिगड़ गई. नानक जेल में पड़ा रहा और ना जाने कैसे, कब, क्यों पाकिस्तान में उसे काकर सिंह कहने लग गए.

माँ के आंसू

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माँ-बाप को पता लगा फ़रवरी 1999 में, जब पाकिस्तान से एक सरकारी लिस्ट आई.

पाकिस्तानी लिस्ट में नानक सिंह के बाप का नाम तो रतन सिंह ही था लेकिन लड़के का नाम काकर सिंह हो गया. हो गए फिर ढाक के तीन पात.

माँ-बाप ने फिर बरसों लगाए ये साबित करने में कि नानक और काकर सिंह एक हैं.

इसके कई साल बाद 2005 में रतन सिंह को बीएसएफ़ का एक ख़त मिला कि उनका बेटा लाहौर की कोट लखपत राय जेल में है.

इस ख़त में उसकी पहचान साबित करने वाले ज़रूरी काग़ज़ात देने को कहा गया था. रतन सिंह ने राशन कार्ड, मूल निवास प्रमाण पत्र और तो और नानक के बचपन की फ़ोटो तक दी लेकिन कुछ नहीं हुआ.

जिस दिन से नानक गुमा उस दिन से अब तक 31 साल हो गए हैं. आलम ये है कि नानक के बूढ़े माँ-बाप के अलावा उसके आठ छोटे भाई बहनों में से किसी को उसकी शक्ल तक याद नहीं.

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माँ के पास बस उसकी एक छुटपन की तस्वीर है जिसे वो निहार कर चुपचाप रोती रहती है.

मदद का वायदा

नानक के पिता रतन सिंह 1984 के उस बदनसीब दिन को याद करते हुए बताते हैं कि नानक को रात भर ढूंढने के बाद अगली सुबह वह पुलिस और बीएसएफ़ के पास पहुंचे.

वहां से एक दिन बाद उन्हें पता चला कि सीमापार, पाकिस्तान एक एक गांव में एक मस्जिद से ऐलान किया जा रहा था कि घर से भटका एक बच्चा मिला है.

रतन सिंह बीएसएफ़ के पास पहुंचे, जिसने पाकिस्तानी रेंजर्स से संपर्क किया. इसके अगले दिन पाकिस्तानी रेंजर्स के साथ सीमपार के गांव के कुछ लोग पहुंचे.

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Image caption नानक के परिवार को बीएसएफ की तरफ से लिखा गया पत्र

वह बताते हैं, "उन्होंने कहा कि बच्चा हमारे पास है लेकिन हमारे कुछ जानवर तुम्हारी तरफ़ (भारतीय सीमा में) आ गए हैं, पहले उन्हें वापस करो. मैं गिड़गिड़ाया कि उनके जानवर मेरे पास नहीं हैं... मुझे मेरा बेटा वापस कर दो लेकिन किसी ने नहीं सुना."

हालांकि अमृतसर के उपायुक्त रवि भगत पीड़ित परिवार की हर तरह से मदद करने का वायदा करते हैं.

उन्होंने कहा, "हम इस मामले को संबंधित अधिकारियों के सामने उठाएंगे और परिवार की हरसंभव मदद करेंगे."

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