ताजमहल प्यार की निशानी या 'मंदिर'?

ताजमहल

आगरा की एक अदालत बुधवार को ताजमहल के हिंदू मंदिर होने या न होने के मामले पर सुनवाई कर रही है.

आगरा के छह वकीलों ने ताजमहल के हिन्दू मंदिर होने का दावा करते हुए अदालत में याचिका दायर की थी.

याचिका में उन्होंने कहा है कि ताजमहल 'शिव मंदिर तेजो महालय' है. याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि ताजमहल में हिन्दुओं को पूजा-प्रार्थना करने की इजाज़त दी जाए.

हालांकि केन्द्र सरकार ने साफ़ कर दिया है कि इस बात के सबूत नहीं हैं कि जहां ताजमहल है, वहां कभी कोई हिन्दू मंदिर था.

नोटिस का जवाब

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नौ अप्रैल को दायर की गई इस याचिका के बाद अदालत ने भारतीय पुरातत्व विभाग, केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय और राज्य के गृह सचिव को नोटिस भेजकर उनसे जवाब मांगा था.

इससे पहले इन्हीं सिविल जज (सीनियर) जया पाठक ने ताजमहल के स्वामित्व को लेकर दायर की गई एक याचिका को ख़ारिज कर दिया था.

Image caption ताजमहल को मुगल बादशाह शाहजहाँ ने अपनी बेगम मुमताज की याद में बनवाया था.

याचिका में वकील हरिशंकर जैन और उनके साथियों ने अदालत से ताजमहल से सभी कथित कब्रों को हटाने और मुसलमानों को वहाँ नमाज़ पढ़ने से रोकने के लिए निर्देश देने की मांग की थी.

जैसे राम जन्मभूमि में रामलला विराजमान की तरफ से मुकदमा दायर किया गया था, उसी तरह इस मुक़दमे में भी अग्रेश्वर महादेव नाग नाथेश्वर विराजमान को संपत्ति के स्वामित्व के लिए मुख्य पैरोकार बनाया गया है.

हरिशंकर जैन ने अपने को नाग नाथेश्वर का दोस्त बताया है.

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