'39 भारतीयों को आईएस ने मार दिया'

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दो साल पहले रोज़गार की तलाश में इराक गए पंजाब के 39 लोगों के सुरक्षित होने को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे है.

इराक गए लोगों में से वापस आए हरजीत मसीह ने दावा किया है कि इराक में कथित तौर पर फंसे 'सभी 39 लोगों की आईएस के लड़ाकों ने गोली मारकर जान ले ली'.

हरजीत के दावों के बाद इराक में फंसे लोगों के परिजन ने सरकार से इस मुद्दे पर सफाई मांगी है. हालांकि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने हरजीत के दावों को गलत बताया है.

इराक में दो साल से लापता मनजीत सिंह की बहन गुरपिंदर कौर का कहना है कि हरजीत मसीह की बातें सुनने के बाद इराक गए सभी लोगों के परिजन तनाव में हैं. गुरपिंदर कहती हैं कि इस मामले में सरकार को स्पष्टीकरण देना चाहिए.

स्पष्टीकरण

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उन्होंने बीबीसी से कहा, "अगर सरकार को लगता है कि वो झूठ बोल रहा है तो सरकार को भी साफ करना होगा कि अगर वो झूठ बोल रहा है तो क्यों बोल रहा है और अगर वो सच बोल रहा है तो सरकार इस बात को क्यों नहीं मान रही?"

इराक में लापता हुए लोगों में से एक अन्य शख्स के रिश्तेदार परमिंदर का कहना है कि फिलहाल उन्हें सरकार और हरजीत दोनों में से किसी की बात पर यकीन नहीं हो रहा है.

परमिंदर ने बीबीसी से कहा, "सरकार की बात पर यकीन करते तो एक साल हो गया. वो बोलते हैं कि आठ देश के सदस्य बोल रहे हैं कि वो लोग बिल्कुल जिंदा हैं, सुरक्षित हैं. हम चाहते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी को चैनल में लिया जाए तभी बात बनेगी."

उधर, आम आदमी पार्टी के सांसद भगवंत मान ने सरकार से इस मामले पर सचाई सामने लाने को कहा है.

मान ने बीबीसी से कहा,"सरकार को स्पष्ट रुप से बता देना चाहिए कि सच क्या है? हरजीत मसीह चश्मदीद गवाह है. उसने बता दिया कि कब क्या हुआ. उसे 10 महीने 11 महीने कस्टडी में क्यों रखा? शायद सरकार इस मामले को लटकाना चाहती थी."

दूसरी तरफ विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा है कि इराक में फंसे सभी भारतीय सुरक्षित हैं. सरकार को अपने सूत्रों पर पूरा भरोसा है.

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