क्यों भारत कम आते हैं चीनी सैलानी

दिल्ली में बढ़ती गर्मी के बावजूद इंडिया गेट, अक्षरधाम मंदिर, कुतुब मीनार या लाल किले के पास बड़ी संख्या में सैलानी देखने को मिल जाएंगे.

लेकिन इनमें चीनी सैलानियों की संख्या बहुत कम होती है.

इंडिया गेट घूम रहे एक चीनी सैलानी ज़ू हॉन्ग चुन कहते हैं, ''भारत में बहुत सारे दर्शनीय स्थल हैं जिनका ऐतिहासिक महत्व है. इनको देखकर बहुत कुछ सीखने को मिलता है.''

वहीं एक अन्य चीनी पर्यटक लिंग ज़िंग शेन लियेन कुछ चुटकी लेते हुए कहते हैं, ''यहां सड़क पर बहुत सारी गाय देखने को मिलती हैं. कभी-कभार यहां का खाना खाकर मेरा पेट भी ख़राब हो जाता है, लेकिन उसके अलावा सब ठीक है.''

वीज़ा नियमों में राहत

ग़ौरतलब है कि इस साल की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में चीनी सैलानियों की संख्या बढ़ाने के लिए एक मुहिम चलाई थी.

इसके अंतर्गत उन्होंने कहा था कि भारत और चीन के बीच अटूट बंधन है. दोनों ही देशों के नागरिकों को बड़ी संख्या में एक-दूसरे के देश जाना चाहिए.

पेटिट्स ट्रेवल एजेंसी के संदीप माधवन कहते हैं, ''भारतीय दूतावास पहले वीज़ा नियमों को लेकर बहुत सख़्त हुआ करता था.''

वो आगे कहते हैं, ''लेकिन पिछले कुछ समय में इन नियमों में कुछ नरमी लाई गई है. पर्यटन की नज़र से चीन और भारत दोनों ही देशों में अभी बहुत संभावनाएं हैं.''

मुश्किलें

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भले ही वीज़ा नियमों में नरमी लाई गई है, लेकिन इसके बावजूद कई मुश्किलें भी हैं. दोनों देश 60 के दशक में एक जंग लड़ चुके हैं. दोनों के बीच सीमा विवाद चलता रहता है.

वहीं तिब्बत और दलाई लामा को लेकर भी दोनों के बीच हमेशा मतभेद बना रहता है.

पर्यटन मंत्रालय के संयुक्त सचिव सुमन बिल्ला कहते हैं, ''दोनों देशों की भाषा में ज़मीन-आसमान का अंतर है. आप जिस तरह से वहां की मीडिया को अपनी बात पहुंचाना चाहते हैं, उसके लिए आपको विशेषज्ञ चाहिए.''

वो आगे कहते हैं, ''हमने भारतीय पर्यटन को चीन में कभी भी बढ़ावा नहीं दिया. अगर हमें चीनी सैलानियों की संख्या बढ़ानी है तो हमें चीनी मार्केट में विशेषज्ञों की टीम चाहिए.''

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