चीन या भारत: बिजनेस कहां आसान?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीन दिवसीय की चीन यात्रा के दूसरे दिन शुक्रवार को बीजिंग में दोनों मुल्कों के बीच 24 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए.

ये समझौते पर्यटन से लेकर, तकनीक, अंतरिक्ष और दूसरे क्षेत्रों के हैं. इसका मतलब ये भी लगाया जा सकता है कि दोनों देशों को एक दूसरे की ताक़तों और कमज़ोरियों का अंदाज़ा है.

शायद इसलिए जब एशिया के इन दो मुल्कों की बात आती है तो उनके बीच तुलना की जाने लगती है– कहां की सड़कें अच्छी हैं, कहां काम करना आसान है, कहां नहीं.

इस मामले में अक्सर लोग चीन को भारत से बेहतर बताते हैं.

गुआंगदोंग और अहमदाबाद

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Image caption रविन गांधी अमरीका के शिकागो में रहते हैं.

बीबीसी ने बात की एक ऐसे व्यवसायी से जिनकी भारत और चीन दोनों जगहों पर फैक्ट्रियां हैं.

अमरीकी शहरी रविन गांधी चीन के गुआंगदोंग में सालों से नान स्टिक कोटिंग मैटीरियल का कारख़ाना चलाते हैं.

इसका इस्तेमाल घरेलू बर्तनों और बिजली के उपकरणों आदि में होता है.

चंद साल पहले गांधी की कंपनी जीएमएम ने गुजरात सूबे के अहमदाबाद में भी अपनी फैक्ट्री शुरू की.

गांधी से मैंने चीन और भारत में काम करने में उन छह अहम फ़र्कों के बारे में पूछा, जिसे उन्होंने महसूस किया-

1-चीन में सरकार में घुसपैठ ज़रूरी

किसी उद्योग को चलाने के लिए भारत में सरकार से ‘संबंध’ उतने अहम नहीं होते, लेकिन चीन में ये बहुत ज़रूरी हैं.

2-भारत दे रहा है कई तरह के फ़ायदे

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भारत में फ़िलहाल पश्चिमी देशों के उद्योग और व्यवसाय जगत को अपने यहां बुलाने की चाहत है और वो इसके लिए कंपनियों को कई तरह की सुविधाएं और दूसरी तरह का बढ़ावा दे रहा है– जैसे टैक्स इंसेटिव.

चीन चूंकि दशकों से अमरीका की फ़ैक्ट्री की तरह काम करता रहा है, इसलिए वहां अंदाज़ थोड़ा बिगड़ सा रहा है.

मुझे उम्मीद है कि इस प्रतिस्पर्धा से दोनों मुल्कों में कामकाज का माहौल बेहतर होगा.

3-चीन में तेज़ी से काम करने की कला

भारत में जनसंसाधन और बौद्धिक संपंदा भरपूर है, लेकिन चीन को मालूम है कि काम को तेज़ी से कैसे किया जाए.

हम अपने भारतीय स्टाफ़ को कुछ महीनों के लिए चीन भेजते हैं, ताकि उन्हें दुनियादारी देखने का मौक़ा मिले और हमारे चीनी ग्राहकों से मिलने के बाद व्यावहारिक ज्ञान मिल सके.

4-भारत में जगह का चुनाव अहम

चीन में चाहे उत्तर हो या दक्षिण काम शुरू करना आसान है.

भारत के मामले में आपका बिज़नेस किस तेज़ी से शुरू होगा, किस तरह की मूलभूत सुविधाएं मिलेंगी या लेबर के मामले में क्या स्थिति होगी, ये इस बात पर निर्भर करेगा कि आप किस राज्य में काम शुरू कर रहे हैं.

5-चीन में समझौते की क़ानूनी हिफ़ाज़त

Image caption भारत में कार कंपनी फ़ोर्ड का कारखाना.

भारत में किए गए क़रार, बौद्धिक संपत्ति अधिकार वग़ैरह को पूरा किए जाने या उस अधिकार की हिफ़ाज़त होने की ज़्यादा विश्वसनीयता है.

आप क़ानून का सहारा भी ले सकते हैं.

6-बेहतर हो रही है भारत में व्यवस्था

हर कोई कहता है कि चीन में मूलभूल ढांचा एशिया में सबसे बेहतर है.

ये सच भी है, लेकिन भारत में भी चीज़ें बेहतर हो रही हैं.

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