मोदी की दक्षिण कोरिया से क्या उम्मीदें होंगी?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन देशों की यात्रा में चीन और मंगोलिया के बाद दक्षिण कोरिया की दो दिवसीय यात्रा पर हैं.

दक्षिण कोरिया की कई बड़ी कंपनियां भारत में पहले ही अच्छा कारोबार कर रही हैं.

ऐसे में भारत को इस यात्रा से क्या उम्मीद करनी चाहिए और दोनों देशों के संबंध अब तक कैसे रहे हैं?

बीबीसी संवाददाता संदीप सोनी ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर कोरियन स्टडीज़ की प्रोफ़ेसर विजयंती राघवन से इसी मुद्दे पर बात की है.

प्रोफ़ेसर विजयंती राघवन:

ऐतिहासिक संबंध

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शुरुआत में तो भारत का झुकाव दक्षिण कोरिया की तरफ़ भी उतना ही था जितना उत्तरी कोरिया की तरफ़. यह तस्वीर भारत में आर्थिक सुधारों के बाद बदली, जब भारत आर्थिक विकास के लिए निवेश चाहता था.

तब उत्तरी कोरिया के पास तो देने के लिए कुछ था नहीं, इसलिए दक्षिण कोरिया से संबंध मज़बूत हुए. वैसे दक्षिण कोरिया से भारत के संबंध हमेशा ठीक रहे हैं.

दोनों देश गुलाम रहे हैं और इसलिए कुछ भावनात्मक समझ भी है. अब क्योंकि दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ रहा है इसलिए दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक संबंध ढूंढ-ढूंढकर निकाले जा रहे हैं.

कहा जा रहा है कि ईसा पूर्व सन 48 में अयोध्या से एक राजकुमारी बौद्ध धर्म का प्रचार करने कोरिया गई थीं और उनकी शादी एक कोरियाई राजा से हुई थी. हालांकि इस कहानी की सच्चाई की पड़ताल अभी की जा रही है.

भारत क्या चाहता है?

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भारत को सबसे ज़रूरत है निवेश की. जबसे भारत ने 2009 में सेपा (कॉम्प्रेहेन्सिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट) पर हस्ताक्षर किए हैं तबसे भारत चाहता है कि दक्षिण कोरियाई कंपनियां भारत आएं. न सिर्फ़ बड़ी, बल्कि मध्यम और छोटे आकार की कंपनियां भी भारत आकर निवेश करें.

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी यही बात कही थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब इसे आगे बढ़ा रहे हैं, मेक इन इंडिया अभियान में निवेश करने का निमंत्रण देकर.

सामरिक हित

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भारत और दक्षिण कोरिया सामरिक क्षेत्र में भी सहयोग करेंगे. दोनों देशों के बीच कई अनुबंधों पर हस्ताक्षर हो भी चुके हैं.

दूसरी बात है पाकिस्तान और उत्तरी कोरिया के बीच परमाणु संबंध को लेकर दोनों देश गुप्तचर जानकारियों के आदान-प्रदान पर भी सहमत हुए हैं.

भारत पाकिस्तान और उत्तर कोरिया के सहयोग को लेकर उत्तर कोरिया के इरादों के बारे में ख़ासा सतर्क है, इसलिए गुप्तचर जानकारियों का आदान-प्रदान एक महत्वपूर्ण मुद्दा है.

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