'ट्रैक्टरों से रौंदकर' मारने के मामले में गिरफ़्तारी

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राजस्थान के नागौर जिले के डांगावास में तीन दलितों की जघन्य हत्या के मामले में पुलिस ने चार लोगों को गिरफ़्तार किया है.

करीब 200 अज्ञात और 12 नामज़द लोगों के खिलाफ़ मामला दर्ज हुआ है पर घटना के तीन दिन बाद भी कई लोगों की गिरफ़्तारियां नहीं हो पाई हैं.

पचास साल पुराने अदालत में लंबित भूमि विवाद को लेकर जाट समुदाय ने जाति पंचायत बुलाई थी. इसमें तीन मेघवाल दलितों को ट्रैक्टरों से रौंद कर मार डाला गया और क़रीब 20 लोग घायल हो गए.

'औरतों से बदसलूकी भी'

एक प्रत्यक्षदर्शी सवर्ण जाति का व्यक्ति भी घटना में मारा गया और करीब छह दलित महिलाओं से बदसलूकी और शारीरक उत्पीडन की शिकायत भी दर्ज की गई है.

मामले की छानबीन कर रहे मेड़ता सिटी पुलिस के अधिकारी नगाराम चौधरी ने घटना की जानकारी दी. लेकिन उन्होंने इस बात से इंकार किया कि पुलिस को जाट और मेघवाल समाज के बीच चल रहे तनाव और जाति पंचायत की सूचना थी.

मेघवाल समाज के प्रतिनिधि धर्माराम देवाल ने बीबीसी से बातचीत में आरोप लगाया,“दबंग जाट समाज ने बर्बरता की हदें पार कर दीं और एक मृतक पांचाराम की तो आँखे तक निकाली गयीं, नाखून नोचे गए.”

'ऐसी चौथी घटना ...'

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धर्माराम देवाल का आरोप है, " इस इलाके में सभी प्रभावशाली जाट लोग हैं और गाँव में मेघवाल परिवारों का जीना दूभर हो रहा है. उनके मुताबिक विगत छह महीनों में दलितों को दबाने की यह चौथी घटना है."

उधर मामले पर जाट समाज के पक्ष के बारे में स्थानीय निवासी राकेश कमेडिया से जब बीबीसी ने बात की तो उन्होंने कहा कि यह ज़मीन बरसों पहले रत्ना राम द्वारा गरीबा राम मेघवाल को और फिर गोगाराम जाट को बेची जा चुकी थी.

उन्होंने कहा, " हाल ही में रत्नाराम मेघवाल के परिवार ने ज़मीन पर कब्ज़ा करने की कोशिश की जिससे विवाद पैदा हुआ." राकेश कमेडिया ने इंकार किया कि जाट समुदाय ने किसी को ट्रैक्टर से रौंदा.

बुधवार को जाटों ने पंचायत बुलाई थी. आरोप है कि इसका बुलावा लेकर पहुंचे युवक की कथित रूप से गोली मारकर हत्या कर दी गई और गुस्साए जाटों ने मेघवालों पर हमला बोल दिया.

अनुसूचित जाति राष्ट्रीय कमीशन के अध्यक्ष पी एल पूनिया ने शनिवार को डांगावास का दौरा किया और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की.

पुलिस पर आरोप

उधर पीपल्स यूनियन ऑफ़ सिविल लिबर्टीज की कविता श्रीवास्तव ने आरोप लगाया, "नागौर एस पी द्वारा इसे जातिगत अपराध नहीं मानना यह दर्शाता है कि दबंग जाति के लोगों का बचाव स्थानीय पुलिस ने खुलकर शुरू कर दिया है.”

विवादित 23 बीघा ज़मीन के कुछ भाग पर मृतक पांचाराम, रत्नाराम और पोखार्रम मेघवाल रहते थे और अपुष्ट ख़बरों के मुताबिक समुदाय को अदालत से “स्टे” मिला हुआ था.

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