बिना ट्यूशन, किसान का बेटा यूपी में अव्वल..

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बस्ती ज़िला मुख्यालय से चालीस किलोमीटर दूर सहसराव गाँव की सोना देवी ख़ुशी से चहक रही हैं.

कभी स्कूल न जा पाईं सोना देवी के बेटे सर्वेश वर्मा ने यूपी के दसवीं के नतीजों में पूरे राज्य में टॉप किया है.

सोना देवी ने बीबीसी को फ़ोन पर बताया, "हमें ये तो मालूम था कि बेटा अच्छा करेगा लेकिन ये नहीं सोचा था कि वो पूरे प्रदेश में टॉप आएगा."

सर्वेश को न ट्यूशन की ज़रूरत महसूस हुई और न ही उन्हें बिजली के अभाव में इलेक्ट्रिक लालटेन में पढ़ने का कोई अफ़सोस है.

रोज़ 20 किलोमीटर का सफ़र तय करने वाले सब्जीवाले के बेटे सर्वेश समाज में आ रहे बदलाव का प्रतीक भी हैं और समाज को बदलने की हसरत भी रखते हैं.

कोई ट्यूशन नहीं

रविवार को जारी यूपी बोर्ड के नतीजों में हरैया के जीएसएएस स्कूल के छात्र सर्वेश ने 96.83 प्रतिशत अंक पाए हैं.

उनके प्रधानाचार्य सुभाष तिवारी ने उनकी कामयाबी पर ख़ुशी ज़ाहिर करते हुए कहा कि सर्वेश से उन्हें बहुत उम्मीदें थीं.

माता सोना देवी बताती हैं, "सर्वेश ने कभी ट्यूशन नहीं ली. हमें भी कभी उसे पढ़ने के लिए नहीं कहना पढ़ा. वो हमेशा कहता था कि मुझे पढ़कर घर की हालत सुधारनी है. स्कूल से आता और पढ़ाई में लग जाता."

सर्वेश के घर में बिजली आती तो है लेकिन कभी-कभी. पढ़ने के लिए वो बिजली से चार्ज होने वाली लालटेन का इस्तेमाल करते हैं.

सोना कहती हैं, "हम इस बात का पूरा ख़्याल रखते की लालटेन चार्ज्ड रहे. गाँव में बिजली का कोई भरोसा नहीं है."

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Image caption सर्वेश का कहना है कि उसे अपने स्कूल में अच्छा माहौल मिला.

सर्वेश के पिता स्वामीनाथ वर्मा एक छोटे किसान हैं. उनके पास सिर्फ़ ढाई बीघा ज़मीन हैं. अतिरिक्त आय के लिए वे सब्जियां बेचते हैं.

सोना देवी कहती हैं, "पाँच सौ रुपए महीना की फ़ीस भरना मुश्किल था. लेकिन स्कूल से मदद मिली. कभी तीन-चाह महीने फ़ीस न देने पर उन्होंने परेशान नहीं किया. गन्ने का भुगतान होते ही हम भी एक साथ फीस जमा कर देते थे."

'अंधकार दूर किया'

सिर्फ़ दसवीं तक पढ़े स्वामीनाथ से जब उनके बेटे की कामयाबी के बारे में बात की तो उनका गला भर आया.

बोले, "मैं नहीं पढ़ पाया था आर्थिक दिक़्क़तों की वजह से. इसलिए सोचा अपने बच्चों के जीवन से अंधकार दूर करना है. बेटे ने बहुत बड़ी ख़ुशी दी है."

सर्वेश की बहन अंजलि वर्मा ने पिछले साल 91 प्रतिशत अंक लाकर बारहवीं पास की थी. लेकिन उसे सरकार से मिलने वाली स्कॉलरशिप का अभी भी इंतेज़ार है.

सर्वेश रोज़ाना दस किलोमीटर का सफर तय करके हरैया स्थित जीएसएएस स्कूल पढ़ने जाते थे.

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सर्वेश अपनी कामयाबी का श्रेय अपने मां-बाप की मेहनत और स्कूल के माहौल को देते हैं.

वे कहते हैं, "मुझे स्कूल में बहुत अच्छा माहौल मिला और अध्यापकों ने हर संभव सहयोग किया."

उन्हें इस बात का बिलकुल भी मलाल नहीं है कि उन्हें रोज़ाना बीस किलोमीटर का सफर पढ़ने के लिए तय करना पढ़ता था.

भ्रष्टाचार दूर करना है

प्रशासनिक अधिकारी बन कर समाज से भ्रष्टाचार दूर करने का सपना देखने वाले सर्वेश कहते हैं कि हमारे समाज में घूसखोरी आम हो गई है.

वो कहते हैं, "हमें सोचना चाहिए कि इसे कैसे दूर किया जाए. मेरे गाँव में ही सार्वजनिक वितरण प्रणाली का इतना बुरा हाल है कि जिन्हें राशन मिलना चाहिए उन्हें नहीं मिलता. ये चीज़े बदलनी चाहिए."

सर्वेश को क्रिकेट बहुत पसंद है. विराट कोहली और एबी डीविलियर्स उनके पसंदीदा खिलाड़ी हैं. उन्हें आईपीएल अच्छा लगता है लेकिन वो क्रिकेट देख नहीं पाते हैं.

हाँ, अख़बार में अपने पसंदीदा खिलाड़ियों से जुड़ी ख़बरें ज़रूर पढ़ते हैं.

इंटरनेट पर हैं, सोशल पर नहीं

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Image caption ग्रामीण भारत में शिक्षा के प्रति रुझान बढ़ा है

पिछले साल उन्होंने अपने स्कूल में हुई एक प्रतियोगिता में एक टेबलेट जीता था. इस टेबलेट ने इंटरनेट के ज़रिए उन्हें दुनिया से जोड़ा.

वे नई-नई जानकारियां लेने के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल करते. लेकिन सर्वेश सोशल मीडिया पर नहीं हैं.

वे कहते हैं, "मुझे ये तो पता है कि फ़ेसबुक होता है जहाँ लोग अकाउंट बनाकर चैट करते हैं, लेकिन मैं फ़ेसबुक पर नहीं हूँ."

अपना ज़्यादातर वक़्त पढ़ाई में देने वाले सर्वेश को प्रेरणादायक फ़िल्में देखना भी पसंद हैं.

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