मोदी का एक साल: कम हुई महंगाई की मार?

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लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने लोगों को महंगाई की मार से राहत दिलाने का वादा किया था. वादा ये भी था कि विदेशों में जमा काला धन वापस भारत लाया जाएगा.

भाजपा सरकार ने पिछले एक साल में किन वादों को पूरा किया, इसका आकलन किया अर्थशास्त्री डॉक्टर राजीव कुमार ने.

वादे जो एक साल में पूरे हुए

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1. हाशिए पर मौजूद लोगों को आर्थिक विकास में शामिल किया गया. इसके लिए कई योजनाएं शुरू की गई हैं. जैसे कि जन धन योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और अटल पेंशन योजना.

2. बुनियादी सुविधाओं वाले सरकारी-निजी भागीदारी यानी पीपीपी मॉडल नाकाम होता जा रहा था. प्रधानमंत्री ने इस मॉडल में दोबारा जान फूंकी है.

3. रेलवे का आधुनिकीकरण शुरू हुआ.

4. प्राकृतिक संसाधनों के आवंटन में घोर पूंजीवाद की बू आती थी उसको हटाने की कोशिश की गई है. कोयला नीलामी और स्पेक्ट्रम नीलामी में हमने देखा कि वो ख़ास पूंजीपति का फायदा करा रहे हैं

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5. निवेशकों के लिए माहौल तैयार करना, मेक इन इंडिया, ई-गवर्नेंस और डिजिटल इंडिया जैसी योजनाओं से निवेशकों को लुभाने की कोशिश करना. प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में सुधार लाना.

वो वादे जो एक साल में पूरे न हो सके

1. प्रधानमंत्री काला धन वापस लाने का वादा पूरा न कर सके हालांकि एक साल पूरा होने से पहले इस सिलसिले में दो बिल पारित कराए गए हैं.

2. ज़मीनी हकीकत नहीं बदली है. मोदी सरकार के एक साल पूरे होने पर आम लोगों के हालात में सुधार नहीं हुआ है. इस हकीकत को मोदी नज़र अंदाज़ नहीं कर सकते.

3. रोज़गार में बढ़ोत्तरी नहीं हुई है. सरकार को अगले 20 सालों तक हर साल 10 लाख नई नौकरियां देनी होंगी लेकिन मोदी सरकार के एक साल में ये लक्ष्य पूरा नहीं हो सका है.

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4. शिक्षा और स्वास्थ्य मामलों में हमने नरेंद्र मोदी को कोई ऐसा क़दम उठाते नहीं देखा जिससे हमें लगे कि सामाजिक क्षेत्र में कोई फ़र्क़ पड़ेगा. इस साल के बजट में मोदी सरकार ने स्वास्थ्य के बजट में 15 प्रतिशत की कमी कर दी जबकि शिक्षा में 16 प्रतिशत की कटौती की गई.

5. नरेंद्र मोदी ने कृषि क्षेत्र में सुधार लाने का वादा किया था जिस पर उन्होंने अब तक ध्यान नहीं दिया है. वो भूमि अधिग्रहण बिल में उलझ कर रह गए हैं.

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