गूजर नेताओं और सरकार के बीच गतिरोध टूटा

राजस्थान में आंदोलनकारी गूजर नेता और सरकार में बातचीत के लिए सहमति बन गई है.

जानकारी मिली है कि शनिवार को भरतपुर के बयाना कस्बे में सरकार और गूजर नेताओ के बीच औपचारिक तौर पर बातचीत शुरू होगी.

गूजर आरक्षण समिति के प्रवक्ता हिम्मत सिंह ने बीबीसी से कहा, ''हमें बातचीत का न्योता मिला है. ये बयाना में शनिवार को सबेरे होगी. सरकार की और से बातचीत में कौन शामिल होगा हमें नहीं मालूम. लेकिन हमारी शर्त ये होगी कि सरकार हमें आरक्षण क़ानूनी स्वीकार्य सीमा 50 फ़ीसदी के अंदर अंदर ही दे."

रेलमार्ग बाधित

समझा जाता है राज्य सरकार की तरफ से कोई वरिष्ठ मंत्री और कुछ अधिकारी इस बातचीत में शामिल होंगे.

इस बीच गूजर अब भी दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग पर धरना दिए बैठे हैं, जिसकी वजह से शुक्रवार को दूसरे दिन भी रेल यातायात बाधित रहा.

रेलवे ने इस मार्ग की अपनी अनेक गाड़ियों के रूट में फेरबदल किया है.

हिम्मत सिंह कहते है गूजर ठोस प्रस्ताव चाहते है.

सुप्रीम कोर्ट ने 1992 के इंदिरा साहनी मामले में आरक्षण की अधिकतम सीमा पचास फीसदी तय कर रखी है.

आरक्षण में दिक्क़त

राज्य में सरकार ने गूजर और कुछ अन्य जातियों को विशेष पिछड़ा वर्ग में मानते हुए पांच प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान कर रखे है. लिहाज़ा राज्य में आरक्षण 50 फीसदी से बढ़कर 54 प्रतिशत हो गया है.

इसमें 21 प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्ग, 16 फ़ीसदी अनुसूचित जाति, 12 फीसदी अनुसूचित जन जाति के लिए आरक्षित हैं.

सरकार अनुसूचित वर्ग के आरक्षण में कोई काट छांट नहीं कर सकती है लेकिन अगर अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण के 21 प्रतिशत कोटे में कोई उलटफेर किया तो इसमें शामिल प्रभावशाली जातियां सहन नहीं करेगी.

गूजर आरक्षण पर अदालत ने स्थगन जारी कर रखा है.

सरकार ने जैसे ही गूजर समुदाय के लिए पांच प्रतिशत की व्यवस्था की, राज्य में आरक्षण बढ़कर 54 % हो गया.

इसे तुरंत अदालत में चुनौती मिल गई और यह कानूनी लड़ाई में फंस गया. सरकार के प्रबंधकों को यह समझ नहीं आ रहा कि कैसे इसका स्वीकार्य हल निकाला जाए.

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