एमजीआर से भी कद्दावर हो गई हैं जयललिता?

जयललिता इमेज कॉपीरइट PTI

शनिवार को तमिलनाडु की मुख्यमंत्री के बतौर जयराम जयललिता की पांचवीं बार सत्ता में वापसी ने कुछ ऐसे सवाल खड़े कर दिए हैं, जो कुछ साल पहले तक सोचे भी नहीं जा सकते थे.

क्या उन्होंने, अपने पथप्रदर्शक, सहयोगी कलाकार और आइकन रहे एमजी रामचंद्रन की छवि को पूरी तरह से ढक दिया है?

'एमजीआर' के नाम से लोकप्रिय एमजी रामचंद्रन ने ही एआईएडीएमके की स्थापना की थी, जिसकी बागडोर इस समय जयललिता के हाथ में है.

एमजीआर की छवि पर जयललिता के छा जाने की बात पर राजनीतिक विश्लेषकों के विचार बंटे हुए हैं.

लेकिन किसी को भी ‘अम्मा’ के गुरुडम (कल्ट) पर संदेह नहीं है, जिसे उन्होंने सालों तक बड़ी मेहनत से अर्जित किया है और यह ‘एमजीआर’ कल्ट से अलग है.

एमजीआर की जगह

इमेज कॉपीरइट

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक वासंती ने बीबीसी को बताया, “एमजीआर अलग थे. जयललिता ने उनकी जगह ले ली है. उन्होंने अम्मा ब्रांड के रूप में एक भलाई करने वाला कल्ट विकसित किया है.”

वासंती ‘जयललिता, ए पोर्टेट’ क़िताब की लेखिका हैं, जिसके ख़िलाफ़ जयललिता ने स्थायी रोक हासिल कर रखी है.

हालांकि एक अन्य राजनीतिक विश्लेषक भगवान सिंह वासंती से थोड़ा असहमत हैं.

वो कहते हैं, “एमजीआर की छवि को कोई नहीं ढक सकता है. उन्होंने लगातार तीन चुनाव जीते. लेकिन, हां एक बात है, उनका एआईएडीएमके पर वैसा नियंत्रण नहीं था, जो आज जयललिता का है. वो दरअसल एक सेना को नियंत्रित करती हैं.”

वासंती कहती हैं कि साल 2000 की शुरुआत में जयललिता अक्सर अपनी सार्वजनिक सभाओं में कहती थीं, ‘आपके सामने आपकी बहन खड़ी है.’ लेकिन 2012 में सत्ता में आने के बाद वो अम्मा बन गईं. एक देवी जैसी, जो जानबूझकर लोगों से दूरी तो बनाए रखती है, लेकिन परोपकारी भी है.

देवी को देखें, पास न जाएं

इमेज कॉपीरइट Reuters

भगवान सिंह कहते हैं, “असल में एमजीआर पर सवाल खड़े किए जा सकते थे. उदाहरण के लिए आरएम वीरप्पन ने एमजीआर को जयललिता से दूर रहने को कहा था. इसले अलावा अन्य लोग भी थे जो कई दूसरी चीजों के लिए उनके आलोचक थे. लेकिन जयललिता पर कोई सवाल नहीं खड़ा सकता.”

वासंती के मुताबिक़, “एक तरह से यह बहुत अजीब जुगलबंदी है. लेकिन यह ऐसी जैसे आप देवी को देख तो सकते हैं, लेकिन उसके पास जा नहीं सकते. यह अपने आप में एक महिला के लिए एक घनघोर महिला विरोधी माहौल में बड़ी उपलब्धि है.”

भगवान सिंह कहते हैं, “अब यह उनकी पार्टी है, हालांकि वो कहती हैं कि इससे एमजीआर की प्रतिष्ठा और बढ़ेगी. हां, पोस्टरों में एमजीआर की फ़ोटो छोटी हो गई है और अम्मा का नाम बड़े अक्षरों में हो गया है. अब उन्हें कोई बहन नहीं बुलाता.”

लोकप्रियता

आय से अधिक संपत्ति मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट से बरी होने के बाद वो फिर से मुख्यमंत्री बन गई हैं, तो अब आगे क्या होगा?

भगवान सिंह कहते हैं, “जब तक सुप्रीम कोर्ट उन्हें बरी करने वाले फ़ैसले को रद्द नहीं करता, वो बहुत अच्छी स्थिति में हैं. विपक्ष परेशानी में है. लेकिन, दिलचस्प है कि बेंगलुरु स्पेशल कोर्ट से दोषी ठहराए जाने और हाईकोर्ट के फ़ैसले के बाद उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है.”

राजनीतिक विश्लेषक केएन अरुण कहते हैं, “जब से उनको सजा हुई तब से से ही प्रशासन ठहर सा गया था. अब वो इसे चलाना शुरू करेंगी. निश्चित रूप से वो ग़रीबों के अलावा निम्न मध्यवर्ग और मध्यवर्ग के लिए लोकप्रिय स्कीमों की घोषणा करना चाहेंगी.”

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार